देवेन्द्र झाझड़िया का जीवन परिचय Devendra Jhajharia Biography in Hindi

Devendra Jhajharia Biography in Hindi : भारतीय भाला फेंक एथलीट देवेन्द्र झाझड़िया का जीवन परिचय लिखा है ।  देवेन्द्र झाझड़िया का सिल्वर जीतना इतना आसान नहीं था इनके जीवन में काफी संघर्ष किया है जिसके बाद इन्होंने टोक्यो पैरा ओलम्पिक (Tokoyo Paralympic 2020 ) सिल्वर मेडल जीता है ।

देवेन्द्र ने जेवलिन थ्रो के F-45 इवेंट में 64.35 मीटर का थ्रो किया और विश्व रिकॉर्ड बनाकर सिल्वर पदक अपने नाम किया है ।

देवेंद्र बचपन से ही एक बेहतरीन खिलाड़ी थे इन्होंने स्कूल स्तर से ही कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीते है  जिसके बाद इन्हें इनके गुरु आरडी सिंह का साथ मिला और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और आज देवेंद्र के लिए परिचय के मोहताज नहीं है ।

आइए आप जानते है देवेन्द्र झाझड़िया के व्यक्तिगत जीवन से लेकर गोल्ड मेडल जीतने की कहानी-

Devendra Jhajharia Biography in Hindi
Devendra Jhajharia wikipedia Age, Family, Education, Hometown etc.

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नाम (Name)देवेन्द्र झाझड़िया
जन्म की तारीख (Date Of Birth)10 जून, 1981
लम्बाई (Height)5.2 feet
वजन (Weight)55kg
पिता (Father Name)राम सिंह झाझड़िया
माता (Mother Name)जीवनी देवी
पत्नी (Wife)मंजू
बच्चे (Children’s)बेटी – जिया (6 साल), बेटा – काव्यान (2 साल)
गुरु (Coach)आर.डी.सिंह
Hero / Idol मिल्खा सिंह
शिक्षा (Education)स्नातक, अजमेर यूनिवर्सिटी, राजस्थान, भारत
पेशा (Profession)एथलीट (शूटिंग)
करंट सिटी (Live City)जयपुर, राजस्थान
जन्म स्थान (Birth Place)झाझड़िया की ढाणी, रतनपुरा, चुरू, राजस्थान
कॉलेज (College)अजमेर यूनिवर्सिटी, राजस्थान
धर्म (Religion)हिन्दू
Eye & Hair Colourकाला

देवेन्द्र झाझड़िया व्यक्तिगत जीवन (Devendra Jhajharia Personal Life)

देवेन्द्र झाझड़िया का जन्म 10 जून 1981 में राजस्थान के एक गाँव झाझड़िया की ढाणी, रतनपुरा पंचायत, राजगढ़ तहसील, जिला चुरू में जाट परिवार में हुआ था ।

देवेन्द्र झाझड़िया के पिता का नाम राम सिंह झाझड़िया है और इनकी माता का नाम जीवनी देवी है जो कि गृहणी है। इनकी पत्नी का नाम मंजू देवी एक पूर्व राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खिलाड़ी है। इनके 6 साल की बेटी है जिसका नाम “जिया” है और 2 साल का एक बेटा है जिसका नाम “काव्यान” है ।

देवेंद्र बचपन से ही एक होनहार खिलाड़ी थे। 8 साल की उम्र में साथ एक बहुत बड़ा हादसा हो गया वह आम के पेड़ पर आम तोड़ने के लिए सड़े लेकिन उन्हें पता नहीं था कि इस पेड़ के ऊपर से 11000 वोल्ट की विद्युत लाइन जा रही है। जिसको इन्होंने हाथ से छू लिया जिसके बाद इनका उपचार किया गया लेकिन इनकी जान बचाने के लिए इनका हाथ काटना पड़ा।

इसके बाद देवेंद्र का जीवन पूरी तरह से बदल गया क्योंकि वह बचपन में ही अपना एक हाथ को चुके थे लेकिन फिर भी देवेंद्र ने हार नहीं मानी और भाला फेंक खेल को चुन लिया और आज देश में ही नहीं विदेशों में भी इनको जाना जाता है।

भारतीय रेल के एक पूर्व कर्मचारी झाझड़िया वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ कार्यरत है।

देवेन्द्र झाझड़िया की शिक्षा (Education)

देवेन्द्र झाझड़िया की प्राथमिक शिक्षा रतनपुरा में के सरकारी स्कूल में ही हुई है और कॉलेज की शिक्षा नेहरु कॉलेज, अजमेर यूनिवर्सिटी, राजस्थान से की है।

देवेन्द्र झाझड़िया का खेल जीवन (Devendra Jhajharia’s Sports Life)

देवेन्द्र ने 1995 में पैरा एथलेटिक्स में भाग लिया। 1997 में कोच रिपुदमन सिंह औलख द्वारा उन्हें एक स्कूल प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा करते हुए देखने के बाद वे खेल में गंभीरता से शामिल हो गए।

शुरुआत में देवेंद्र की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी जिस कारण वह है लकड़ी के भाले से ही अभ्यास किया करते थे. आर्थिक संकट होने के बावजूद भी देवेंद्र ने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक अपने नाम किए ।

स्कूल टाइम में भी देवेंद्र ने बहुत सारे स्वर्ण पदक जीते थे । इन्होंने सबसे पहले शॉट पुट खेल खेलने की कोशिश की जिसमें इन्हीं मजा नहीं आया और इन्होंने पाया कि यह भारी था, डिस्कस में भी ज्यादा मजा नहीं आया ।

देवेंद्र का खेलों के प्रति बहुत जुनून था वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करना चाहते थे लेकिन उनके पास सही उपकरण नहीं थे इसके लिए उन्होंने राजस्थान सरकार से भी गुहार लगाई लेकिन राजस्थान सरकार ने कोई मदद नहीं की ।

इसके बाद एक खेल प्रेमी राम स्वरूप सिंह ने उन्हें ₹75000 दिए जिसके बाद देवेंद्र ने भाला खरीदा और  स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहे।

  • 2002 में देवेंद्र झाझड़िया ने दक्षिण कोरिया में 8वीं FESPIC खेलों में पहला स्वर्ण पदक जीता था।
  • इसके बाद सन 2004 में देवेन्द्र, पहली बार पैरालम्पिक खेल में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एथलीट के रूप में चुने गए. यहाँ देवेन्द्र ने भाला फेंक गेम में हिस्सा लिया और पुराने रिकॉर्ड 59.77 मीटर को पीछे छोड़ते हुए, अपना नया रिकॉर्ड 62.15 मीटर का बना दिया।
  • सन 2013 में देवेन्द्र नेफ़्रांस के लयों में आयोजित ‘आईपीसी एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप’ में हिस्सा लिया। जहाँ देवेन्द्र को ऍफ़46 भाला फेंक में एक बार फिर गोल्ड मैडल मिला।
  • सन 2014 में देवेन्द्र ने साउथ कोरिया में आयोजित ‘एशियन पैरा गेम्स’ में एक बार फिर सिल्वर मैडल जीता।
  • सन 2015 में दोहा में आयोजित ‘आईपीसी एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप’ ने अपना बेस्ट देते हुए 59.06 मीटर की ऊंचाई पर भाला फेंका और दुसरे स्थान पर रहते हुए सिल्वर मैडल प्राप्त किया था।
  • सन 2016 में देवेन्द्र ने दुबई में आयोजित ‘आईपीसी एथलेटिक्स एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप’ में एक बार फिर गोल्ड मैडल अपने नाम किया।
  • सन 2016 में ही देवेन्द्र ने रियो ग्रीष्मकालीन पैरालिम्पिक 2016 में पुरुष भाला फेंक ऍफ़ 46 इवेंट में हिस्सा लिया और अपने 2004 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 63.97 मीटर का नया रिकॉर्ड बना दिया।
  • सन 2021 में ही देवेन्द्र ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में पुरुष भाला फेंक ऍफ़ 46 इवेंट में हिस्सा लिया और अपने 2016 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 64.35 मीटर का नया रिकॉर्ड बना है और दुसरे स्थान पर रहते हुए सिल्वर पदक जीता है।

देवेन्द्र झाझड़िया  की रुचि (Devendra Jhajharia Hobby)

संगीत सुनना, फिल्में और टेलीविजन देखना, खेल खेलना और अपने परिवार के साथ समय बिताना।

पुरस्कार और सम्मान Awards and Honours

  • 2021 में उन्हें भारत में स्पोर्टस्टार एसीईएस अवार्ड्स में पैरा स्पोर्ट्समैन ऑफ द डिकेड नामित किया गया था।
  • 2017 में उन्हें भारत में खेल रत्न पुरस्कार मिला।
  • देवेन्द्र रियो डी जनेरियो में 2016 पैरालंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत के ध्वजवाहक थे।
  • उन्हें 2014 फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री [FICCI] पैरा स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ द ईयर नामित किया गया था।
  • 2012 में देवेन्द्र को पद्मश्री मिला। यह सम्मान भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
  • 2005 में उन्हें भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार दिया गया था। इसी वर्ष राजस्थान में सरकार ने उन्हें महाराणा प्रताप पुरस्कार से सम्मानित किया।

Sporting philosophy / motto खेल दर्शन / आदर्श वाक्य

जब आप ठान लें तो इस दुनिया में कुछ भी कर सकते है।

FAQ

देवेन्द्र झाझड़िया कहां के रहने वाले है?

देवेन्द्र झाझड़िया झाझड़िया की ढाणी, रतनपुरा, चुरू, राजस्थान के रहने वाले है

देवेन्द्र झाझड़िया Age कितनी है?

देवेन्द्र झाझड़िया की जन्म दिनांक 10 जून, 1981 है और इनकी आयु 40 वर्ष है

देवेन्द्र झाझड़िया कौन सा खेल खेलते है?

देवेन्द्र झाझड़िया भाला फेंक खेल खेलते है

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