मकर संक्रांति पर निबंध – Makar Sankranti Essay in Hindi

Makar Sankranti Essay in Hindi : दोस्तों आज हमने मकर संक्रांति त्योहार पर निबंध लिखा है Makar Sankranti Essay की सहायता से हमने सरल भाषा में इस त्यौहार के लिए प्रचलित संस्कृतियों एवं विचार धाराओं के बारे में बताया है साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों में यह त्योहार किस तरह मनाया जाता है इसका भी वर्णन किया गया है.

Makar Sankranti पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए है. इस निबंध को हमने सभी कक्षा के विद्यार्थियों की सुविधा को देखते हुएअलग-अलग शब्द सीमा में लिखा है.

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भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक मुख्य त्योहार मकर सक्रांति भी है जिसे लगभग पूरे भारत भर में मनाया जाता है यह त्योहार हर वर्ष एक निश्चित तारीख को ही मनाया जाता है इस त्यौहार को जनवरी माह की 14 तारीख को मनाया जाता है.

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Makar Sankranti Essay in Hindi for all school students

इस त्यौहार को सभी राज्यों में अलग-अलग नाम और विभिन्न विचारधाराओं के साथ मनाया जाता है. पुराने ग्रंथों के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस त्योहार को मकर सक्रांति का नाम दिया गया है.

इस दिन कई जगह तिल के लड्डू बनाए जाते हैं तो कुछ जगह पतंगे उड़ाई जाती है और उत्तर प्रदेश राज्य में इस दिन खिचड़ी बनाई जाती है. और जिन राज्यों में पवित्र नदियां बहती है

वहां के लोग सुबह उठ कर उन नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य देवता को नमन करते है. इस तरह यह त्यौहार विभिन्न विचारधाराओं और संस्कृतियों का मिलाजुला रूप है.

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हमारा देश त्योहारों का देश है इसलिए यहां पर प्रत्येक दिन कोई ना कोई त्योहार जरूर मनाया जाता है त्योहारों के कारण ही भारत इतना विशाल देश होने के बावजूद भी यहां के लोग एक दूसरे से प्रेम भाव पूर्ण रहते है.

भारत में प्रमुख रूप से और हर्षोल्लास से मनाया जाने वाले त्योहारों में से एक मकर सक्रांति भी है जिसको भारत के प्रत्येक राज्य में एक अलग नाम और संस्कृति के साथ मनाया जाता है.

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सभी राज्यों में इस त्यौहार को एक अलग नाम दिया गया है जैसे गुजरात और उत्तराखंड में इस त्योहार को “उत्तरायण” के नाम से जाना जाता है हरियाणा हिमाचल प्रदेश पंजाब राज्यों में इस त्यौहार को “माघी” नाम से जाना जाता है और उत्तर प्रदेश पश्चिम बिहार में सक्रांति के त्यौहार को “खिचड़ी” के नाम से भी जाना जाता है.

हिंदू कैलेंडर के अनुसार सूर्य 12 राशियों में समय-समय पर परिवर्तन करता रहता है उसी के अनुसार सूर्य मकर संक्रांति के दिन धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस त्यौहार को मकर सक्रांति कहा जाता है लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन सूर्य मकर रेखा पर होता है इसलिए इस त्यौहार का आयोजन किया जाता है.

सामान्य तौर पर इस दिन लोग तिल के लड्डू, घेवर, खिचड़ी आदि मीठे व्यंजन बनाते है और अपने इष्ट देवता को भोग लगाकर इस त्यौहार का आनंद उठाते है. मकर सक्रांति आते आते किसानों की फसल भी कर तैयार हो जाती है.

वे भी अपनी फसल का कुछ हिस्सा दान में देते है और त्यौहार को बड़े ही चाव से मनाते है राजस्थान जैसे राज्यों में इस दिन पतंगबाजी भी की जाती है जो कि लोगों की खुशियों को दर्शाती है.

लोगों का मानना है कि इस दिन जो भी लोग दान धर्म करते हैं अन्य दिनों के मुकाबले जिन्होंने अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है इसीलिए लोग इस दिन मिठाईयां कंबल कपड़े हाथी का दान करते है. इस तरह इस त्यौहार को सभी राज्यों में बड़े ही रोचक ढंग से मनाया जाता है.

Makar Sankranti Essay in Hindi 500 words


हिंदू धर्म में प्रमुख रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक मकर सक्रांति भी है जिसे हिंदू धर्म के लोग बड़े ही धूमधाम से हर साल जनवरी माह की 14 जनवरी को मनाते है. यह त्यौहार हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है कुछ ही ऐसे वर्ष आते है जिसमें इस त्यौहार को 15 जनवरी को मनाया जाता है.

मकर सक्रांति का यह त्यौहार पूरे भारत के साथ-साथ नेपाल भूटान बांग्लादेश जैसे देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है नेपाल में तो इस त्यौहार के दिन राजकीय अवकाश भी घोषित किया जाता है. यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होता है इस समय चारों ओर मौसम खुशनुमा होता है और मौसम में एक अलग ही ही ताजगी भरी हुई होती है.

मकर सक्रांति का यह त्यौहार भारत के लगभग सभी राज्यों में मनाया जाता है लेकिन इस त्यौहार को लोग सभी राज्य में अलग-अलग नाम से पुकारते है. यह त्यौहार खुशियों में हर्षोल्लास से भरा हुआ त्यौहार है जो कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है.

इस त्यौहार के दिन सभी राज्यों में अलग अलग संस्कृति और विचारधारा देखने को मिलती है जो कि सभी लोगों को आपस में जोड़ने का काम करती है. हिंदू धर्म की कैलेंडर के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस त्यौहार को मकर सक्रांति कहा जाता है.

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हिंदू धर्म में इसी दिन से सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते है इसलिए भी इस त्यौहार को अधिक महत्व दिया जाता है. तमिलनाडु राज्य में इस त्यौहार को पोंगल के नाम से मनाया जाता है वहां के लोग इस दिन अपनी फसल काट कर सूर्य देवता को भोग लगाते हैं और उन्हें नमन करते है.

आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक जैसे राज्यों में त्यौहार को सक्रांति के नाम से जाना जाता है हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में इस त्यौहार को “माघी” नाम से जाना जाता है उत्तर प्रदेश राज्य में सवार को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है क्योंकि यहां पर इस दिन सूर्य को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है.

राजस्थान में इस दिन रंग बिरंगी पतंगे उड़ाई जाती है जो की खुशियों का प्रतिक होती है और साथ ही गुड़ और तिल के लड्डू बनाए जाते है. मकर सक्रांति के इस त्यौहार को दान का सबसे बड़ा फरवरी कहा जाता है लोगों का मानना है कि इस दिन जो भी दान किया जाता है उसका अधिक पुण्य मिलता है.

इसलिए इस दिन लोग सुबह से ही कंबल, कपड़े, मिठाईयां गरीबों में बांटना प्रारंभ कर देते हैं इस दिन कुछ लोग शरबत और पकोड़े भी बांटते है. जिन राज्यों से गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी पवित्र नदियां होकर निकलती है वहां के लोग सुबह सूर्य उदय के समय नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य को जल अर्पण करते है. उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है.

इसी दिन के बाद भारत का सबसे बड़े कुंभ के मेले का आयोजन किया जाता है. यह त्योहार अपने आप में कई संस्कृतियों एवं विचारधाराओं को लिए हुए चलता है जो कि समाज के हर वर्ग के लोगों को पसंद आता है इसीलिए मकर सक्रांति के त्यौहार को सभी लोग खूब धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाते है.

Makar Sankranti Essay in Hindi Full Essay


प्रस्तावना –

मकर संक्रांति का त्यौहार दानपुर ने खुशियों और हर्षोल्लास का त्यौहार है क्योंकि इस दिन हर वर्ग के लोग खुश होते हैं गरीब लोगों को अच्छे वस्त्र और मिठाइयां मिलती है इसलिए भी खुश होते हैं और दान देने वाले लोग पुण्य कमाकर खुश होते है.

यह त्यौहार हिंदू धर्म की परंपराओं के अनुसार भारत देश के साथ साथ नेपाल बांग्लादेश भूटान आदि देशों में भी खूब धूमधाम से मनाया जाता है. भारत में इस त्यौहार को मनाने की हर राज्य की एक अलग परंपरा है भले ही इस त्यौहार को मनाने के तरीके अलग अलग हो लेकिन सभी का मकसद दान पुण्य करना ही होता है.

हिंदू धर्म में यह वर्ष का प्रथम बड़ा त्यौहार होता है इसलिए लोगों में इस त्यौहार को धूमधाम से मनाने की बहुत चाहे होती है.

मकर संक्रांति का त्यौहार कब है –

मकर सक्रांति का शुभ पर्व वर्ष 2019 में 15 जनवरी को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म के कैलेंडर के अनुसार पौष मास में जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है उसी दिन मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है.

मकर सक्रांति का त्यौहार क्यों मनाया जाता है –

मकर सक्रांति के त्यौहार को मनाने के पीछे सभी लोगों के अलग-अलग तरह के हैं लेकिन हिंदू धर्म के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व उसी दिन मनाया जाता है जब सूर्य धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है इसीलिए इस चौहान का नाम ‘सक्रांति’ से “मकर सक्रांति” हो गया है.

वैज्ञानिकों के अनुसार इसी दिन से पहले तक सूर्य का उदय पूर्व दिशा से होकर दक्षिण दिशा में अस्त होता था लेकिन इस दिन के बाद सूर्य पूर्व दिशा में उदय होकर उत्तरी गोलार्ध में अस्त होता है इसीलिए इसी दिन से रात का समय छोटा होने लगता है और दिन बड़े होने लगते है.

मकर सक्रांति के विभिन्न नाम –

मकर संक्रमणकर्नाटक
खिचड़ी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार
माघीहरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब
पौष संक्रान्तिपश्चिम बंगाल
भोगाली बिहुअसम
उत्तरायणगुजरात, उत्तराखण्ड
शिशुर सेंक्रातकश्मीर घाटी
ताइ पोंगल, उझवर तिरुनलतमिलनाडु
मकर संक्रान्तितेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश,राजस्थान, सिक्किम, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, मणिपुर, उत्तराखण्ड, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोआ

मकर सक्रांति के त्यौहार पर राज्यो में प्रचलित संस्कृतियां-

राजस्थान –

राजस्थान में मकर सक्रांति की त्यौहार को एक अलग ही तरीके से मनाया जाता है यहां पर मकर संक्रांति के दिन गुड के लड्डू, तिल के लड्डू, घेवर, जलेबी आदि मिठाइयां बनाई जाती है. इस दिन लोग अपनी हर्षोल्लास को दर्शाने के लिए रंग बिरंगी पतंगे भी उड़ाते है जो कि खुले आसमान में बहुत ही सुंदर लगती है

इस दिन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी पतंग उड़ाने में व्यस्त रहते हैं और साथ ही मिठाइयों और गुलगुले, पकौड़ा का आनंद उठाते है. महिलाएं दिन सूर्य देवता की कहानियां सुनती हैं और व्रत भी रखती है. हिंदू धर्म में इसी दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत भी होती है.

उत्तर प्रदेश, पश्चिम बिहार –

उत्तर प्रदेश और पश्चिम बिहार में लोग इस त्यौहार को खिचड़ी के नाम से जानते हैं क्योंकि इस दिन वहां के लगभग सभी घरों में खिचड़ी बनाई जाती है और सूर्य देवता को भोग लगाया जाता है साथ ही वहां पर बहने वाली नदियों में सुबह लोग जाकर स्नान करते है.

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और सूर्य को जल अर्पित करते है इसके बाद भी दान धर्म का कार्य करते हैं जैसे फल बांटना कपड़े बांटना कंबल और अन्य वस्तुएं दान की जाती है वहां के लोगों की मान्यता है कि इस दिन दान करने से उन्हें अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है.

तमिलनाडु –

तमिलनाडु में यह त्योहार पोंगल उत्सव के नाम से मनाया जाता है तमिलनाडु हिंदू धर्म को मानने वाले लोग अपनी फसल काटकर अपने इष्ट देवता को उसका भोग लगाते है. वहां के लोगों के लिए यह दिन सुख एवं संपन्नता का प्रतीक होता है.

पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा –

पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा राज्यों में इस त्यौहार को मां की नाम से जाना जाता है पंजाब में यह है उत्सव 13 जनवरी को ही मना लिया जाता है जिसे लोहड़ी नाम भी दिया गया है. वहां के लोग लकड़ियों को जलाकर उसमें तिल मक्का एवं अन्य मिठाइयां डालते है और उसकी पूजा करते है.

गुजरात, उत्तराखंड राज्य –

गुजरात और उत्तराखंड राज्य में इस त्यौहार को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस समय सूर्य का पूर्व दिशा में उदय होकर उत्तर दिशा में अस्त होता है इसलिए इसे उत्तरायण कहा जाता है. यहां के लोग भी खूब मिठाइयां बांटते हैं और दान धर्म करते है.

महाराष्ट्र –

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है यहां पर महिलाएं कपास नमक और तेल विवाहित महिलाओं को दान करती है. यहां की महिलाएं तिल के लड्डू और गुड भी बांटती है उनका मानना है कि गुड़ के लड्डू बांटने से लोग मीठा और अच्छा बोलते है.

बंगाल –

बंगाल में इस दिन तिल दान करने की प्रथा है यहां के गंगा सागर में इस दिन बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है जहां पर सभी लोग इस त्योहार को बहुत ही हर्षोल्लास से मनाते है. क्योंकि यहां पर साल में मकर सक्रांति के दिन एक बार ही गंगासागर का मेला लगता है

इसी दिन जो लोग नदी में स्नान कर लेते है वह सारे तीर्थ कर लेते है वहां की एक कहावत भी बहुत प्रचलित है “सारे तीरथ बार बार, गंगा सागर एक बार।”

असम –

असम के लोग इस त्यौहार को माघ-बिहू या भोगाली-बिहू के नाम से जानते है. यहां के लोग भी तिल के लड्डू बनाते हैं और इस दिन दान पुण्य करने में विश्वास रखते है.

मकर संक्रांति का महत्व –

ऐतिहासिक महत्व – पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते है. चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी है इसलिए इस दिन को मकर सक्रांति के रूप में जाना जाता है.

एक अन्य पौराणिक एवं ऐतिहासिक घटना के अनुसार इसी दिन भीष्म पितामह ने अपने प्राणों का त्याग किया था और मकर सक्रांति की इसी शुभ अवसर पर गंगा नदी भागीरथ के पीछे चल कर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई समंदर (सागर) तक पहुंची थी.

सामाजिक महत्व – जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि इस त्यौहार को सभी लोग अपने अपने तरीकों और विचारों के अनुसार मनाते हैं इसलिए इस त्योहार के कई रंग देखने को मिलते हैं यह त्योहार सुख संपदा एवं दान पुण्य का त्यौहार है.

इस दिन सभी लोग एक दूसरे से मिलते हैं और बड़े ही धूमधाम से इस उत्सव को मनाते है. भले ही लोगों की इस उत्सव को लेकर नाम और संस्कृतियों में विविधता नजर आती हो लेकिन यह त्यौहार लोगों को जोड़ने का काम करता है क्योंकि आजकल लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इतने व्यस्त हो गए हैं कि वे अपने लोगों को भी समय नहीं दे पाते है.

इन त्योहारों के माध्यम से ही हम एक दूसरे से मिल पाते हैं और अपनी खुशियां बांट पाते है. इसीलिए यह तो हर खुशी एवं सोहार्द का प्रतीक है.

उपसंहार –

आज भागदौड़ भरी जिंदगी में त्यौहार ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है क्योंकि त्योहारों के कारण ही लोग एक दूसरे को जानते हैं और इन्हीं के कारण वह अपने सुख दुख बांटते है. इन्हीं त्योहारों के कारण भारत के लोगों में विभिन्नताएं होते हुए भी यहां पर एकता देखने को मिलती है.

इन्हीं त्योहारों में से एक मकर सक्रांति भी है जो कि हिंदू धर्म में अपना एक प्रमुख महत्व रखता है यह त्यौहार पूरे भारतवर्ष के साथ-साथ नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि देशों में भी मनाया जाता है. त्योहार हमेशा लोगों को जोड़ने का काम करते हैं इसीलिए सभी लोगों को त्यौहार अच्छे लगते है.


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