गणेश चतुर्थी पर निबंध – Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi

Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi आज हम गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में लिखने वाले हैं. यह निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए है. Ganesh Chaturthi निबंध को हमने अलग-अलग शब्द सीमा में लिखा है जिससे अनुच्छेद और निबंध लिखने वाले विद्यार्थियों को कोई भी परेशानी नहीं हो और वह Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi के बारे में अपनी परीक्षा में लिख सकेंगे.

Short Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi


हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों द्वारा प्रत्येक वर्ष अगस्त और सितंबर माह के बीच चतुर्थी के दिन गणेश चतुर्थी त्योहार मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी गणेश जी के जन्मदिन का दिन होता है. हिंदू धर्म में आने वाले बड़े त्योहारों में से एक गणेश चतुर्थी भी है जिसका आयोजन प्रत्येक वर्ष 11 दिनों तक किया जाता है.

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Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi for all school student

हिंदू धर्म के लोग गणेश जी को अपना इष्ट देवता मानते है जब भी कोई शुभ कार्य करते हैं तब सबसे पहले इन्हीं की पूजा की जाती है. गणेश जी की पूजा सबसे पहले इसलिए की जाती है क्योंकि यह सब के विघ्न हर लेते है इसीलिए गणेश जी का दूसरा नाम विघ्नहर्ता भी है.

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भगवान गणेश को बुद्धि और समृद्धि का देवता भी कहा जाता है इसलिए ये सभी को पसंद है. चतुर्थी के दिन सभी लोगों द्वारा अपने घर पर मिट्टी की गणेश प्रतिमा विराजमान की जाती है और 10 दिनों तक उनकी पूजा की जाती है और अनन्त चतुर्दशी के दिन अथार्त 11वें दिन समुंदर या किसी बड़ी नदी में गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है. गणेश चतुर्थी का यह उत्सव बड़ी धूमधाम से पूरे देश भर में मनाया जाता है.

Ganesh Chaturthi Essay in Hindi 350 Words


गणेश चतुर्थी हिंदू त्योहारों में यह सबसे लंबे चलने वाले त्योहारों में से एक है. यह त्यौहार चतुर्थी के दिन प्रारंभ होता है और अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है यह 11 दिनों तक लंबा चलने वाला त्यौहार है. पूरे देश में सभी जगहों पर यह त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है.

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अगस्त या सितंबर में हिंदू कैलेंडर के चतुर्थी के दिन प्रत्येक घर गली मोहल्लों में गणेश जी की प्रतिमा को विराजमान किया जाता है. प्रतिमा को विराजमान करने से पहले सभी लोग बड़ी धूम-धाम से नाचते बजाते गाते है. श्री गणेश जी की आरती के साथ गणेश जी की प्रतिमा को विराजमान किया जाता है.

फिर 10 दिनों तक सुबह-शाम गणेश जी की प्रतिमा की पूजा की जाती है सभी लोग इस पूजा में भाग लेते है. इस दिन शहर के बड़े-बड़े चौराहों पर रंग बिरंगी लाइट लगाकर हर तरफ रोशनी कर दी जाती है.

गणेश जी का बाल रूप बच्चों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है इसलिए बच्चों द्वारा इन्हें बाल गणेशा कह के भी पुकारा जाता है. यह त्योहार प्रमुख रूप से महाराष्ट्र राज्य में मनाया जाता है हालांकि वर्तमान में भारत के सभी राज्यों में गणेश उत्सव मनाया जाता है.

इस त्यौहार का आयोजन हर वर्ष किया जाता है और गणेश जी की मूर्ति घर पर लाई जाती है ऐसा माना जाता है कि जब गणेश जी की मूर्ति घर पर लेकर आते हैं तब सुख और समृद्धि घर में आती है और जब 10 दिनों बाद गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन के लिए लेकर जाया जाता है तब ऐसा माना जाता है कि गणेश जी घर से सभी दुख दुविधाए अपने साथ ले जाते है.

गणेश उत्सव का समापन 11 दिन होता है इस दिन श्रद्धालुओं के लिए भंडारा आयोजित किया जाता है जिसमें सभी लोग भोजन ग्रहण करते हैं उसके पश्चात गणेश जी की अंतिम आरती की जाती है. फिर गणेश जी की मूर्ति को नदीय समुंदर तक ले जाने के लिए एक सुंदर रथ में सजाई जाती है और पूरे शहर भर में झांकी और शोभायात्रा निकाली जाती है.

सभी लोग खूब हर्षोल्लास से इस शोभायात्रा में भाग लेते हैं और गणेश जी के आगे बैंड बाजों की धुन पर मस्त मगन होकर नाचते है और अंत में बाबा मोरिया के जयकारे लगाते हुए नदी या तालाब में गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है.

Essay on Ganesh Chaturthi in Hindi


प्रस्तावना –

गणेश चतुर्थी जी भारत के विभिन्न बड़े त्योहारों में से एक है मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म दिन हुआ था. यह त्योहार मुख्यत है हिंदू समाज के लोगों द्वारा मनाया जाता है लेकिन वर्तमान में सभी धर्मों के लोग गणेश उत्सव को खूब धूमधाम से मनाते है.

Ganesh Chaturthi भारत के लोकप्रिय त्योहारों में से एक है यह त्योहार 10 दिन तक लंबा चलने वाला उत्सव है. इसकी तैयारियां लोगों द्वारा महीनों पहले ही करनी चालू कर दी जाती है. गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है और को धूमधाम से उनकी 10 दिनों तक सुबह शाम पूजा-अर्चना की जाती है.

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सभी हिंदू देवताओं में सबसे पहले भगवान गणेश को पूजा जाता है. 10 दिनों तक पूजा करने के बाद 11वे दिन “अगले वर्ष जल्दी आना की मंगल कामना के साथ” भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है.

गणेश उत्सव कब मनाया जाता है –

गणेश चतुर्थी पूरे भारतवर्ष में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है. इस त्योहार का आयोजन प्रत्येक वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त और सितंबर माह के बीच शुभ मुहूर्त के अनुसार किया जाता है जबकि हिंदू पंचांग के अनुसार इस त्यौहार का आयोजन भाद्र माह में किया जाता है.

इस वर्ष 2018 में इस त्यौहार का आयोजन 13 सितंबर से लेकर 23 सितंबर तक किया गया. यह त्योहार 10 दिनों तक एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है. यह त्यौहार चतुर्थी के दिन प्रारंभ होता है और अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है. लेकिन आजकल कुछ जगह इस त्योहार की समाप्ति 7 दिनों के अंदर ही कर दी जाती है.

भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ –

भगवान गणेश के जन्म के पीछे भी बहुत ही आश्चर्यजनक घटना है. पौराणिक ग्रंथों और कहानियों के एक दिन अनुसार मां पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर के मैल से एक बालक की आकृति की मूर्ति बनाई फिर उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से उस मूर्ति में प्राण फूंक दिए.

जिसके पश्चात उस मूर्ति ने भगवान गणेश का रूप ले लिया लेकिन भगवान गणेश को सभी देवताओं के लोगों द्वारा तब जाना गया जब मां पार्वती ने अपने पुत्र गणेश को कहा कि वे महल के द्वार पर जाकर खड़े हो जाएं क्योंकि वह स्नान कर रही है और आदेश दिया कि किसी को भी महल के अंदर आने न दिया जाए.

पुत्र गणेश जी मां की आज्ञा का पालन करते हुए द्वार पर जाकर खड़े हो गए तभी संयोगवश वर्षों की तपस्या के बाद भगवान शिव जोकि बालक गणेश की पिता है वे आए और महल के अंदर प्रवेश करने लगे तभी बालक गणेश ने उन्हें रोक दिया. भगवान शिव ने बाल गणेश को बहुत समझाया लेकिन बालक गणेश नहीं माने और मां पार्वती के दिए आदेश पर अटल रहे.

भगवान शिव को इस बात पर क्रोध आ गया और उन्होंने बालक गणेश के सिर को धड़ से अलग कर दिया. इस समय भगवान शिव का पता नही था की यह बालक उनका पुत्र है. बालक गणेश की चीख सुनकर मां पार्वती बाहर दौड़ी चली आयी और अपने पुत्र को मृत देख कर बहुत दुखी हुई और साथ ही क्रोधित भी हुई.

जब मां पार्वती ने भगवान शिव को बताया कि यह उनके पुत्र है तो भगवान शिव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने नंदी को आदेश दिया कि सूर्योदय से पहले अपनी मां के साथ सोए हुए किसी भी जानवर का सर काट कर ले कर आओ.

नंदी कुछ समय पश्चात हाथी के बच्चे का सर काट कर ले कर आए और भगवान शिव ने अपने दिव्य शक्ति से उसे अपने पुत्र गणेश के धड़ से जोड़ दिया और बालक गणेश फिर से जीवित हो गए. इस समय सभी देवताओं ने बाल गणेश को अपनी विभिन्न शक्तियां दी.

गणेश उत्सव की तैयारी –

भारत के प्रत्येक राज्य, शहर, गली-मोहल्लों में गणेश उत्सव को बड़ी ही धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है. यह त्योहार मुख्यतः हिंदू लोगों द्वारा मनाया जाता है लेकिन वर्तमान में सभी धर्मों के लोग को बढ़-चढ़कर इस उत्सव में भाग लेते है.

गणेश चतुर्थी की तैयारियां लोगों द्वारा महीनों पहले ही करनी चालू हो जाती है. यह अन्य त्योहारों की तरह एक दिन में समाप्त नहीं होता है इस त्यौहार को उत्सव के रूप में 10 दिनों तक मनाया जाता है. इस त्यौहार की तैयारियों को लेकर मूर्तिकार मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां महीनों पहले ही बनाना चालू कर देते है.

बाजारों में इस त्यौहार के कुछ दिन पहले ही मूर्तियां सजनी चालू हो जाती है. बाजारों और गली मोहल्लों को रंग बिरंगी लाइटो द्वारा सजाया जाता है जो कि देखने में बहुत ही सुंदर लगता है. इस त्योहार के आने से पहले बाजार में एक अनोखी रौनक आ जाती है लोगों के चेहरों पर खुशी देखते ही बनती है.

भगवान गणेश की मूर्ति को रंग बिरंगी रंगों से सजाया जाता है. फिर गणेश उत्सव के दिन लोगों द्वारा बाजार से मूर्तियां खरीदकर लाई जाती है और घरों में स्थापित की जाती है. घरों में लोग छोटी मूर्तियां स्थापित करते हैं और नगर के गली मोहल्लों में बड़ी मूर्तियां स्थापित करते है.

जब भी भगवान गणेश की प्रतिमा को गडरिया गली मोहल्लों में स्थापित करने के लिए लाया जाता है तब खूब ढोल नगाड़े बजाए जाते है लोग तरह-तरह के निर्णय कर कर भगवान गणेश का स्वागत करते हैं महिलाओं द्वारा मंगल गान गाए जाते है.

जहां पर मूर्ति स्थापित की जानी होती है वहां पर बहुत बड़ा पांडाल लगाया जाता है साथ ही रोशनी की व्यवस्था के लिए रंग-बिरंगी लाइटे लगाई जाती हैं जिससे पूरा पांडाल जगमग हो जाता है. फिर पंडितो द्वारा भगवान गणेश की आरती की जाती है आरती में नगर के सभी लोग शामिल होते है और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान गणेश जी आरती के पश्चात आशीर्वाद लेते है.

भगवान गणेश की आरती के बाद लोगों को भगवान गणेश के आशीर्वाद के रूप में प्रसाद दिया जाता है ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश को खाने में मोदक (लड्डू) और केले बहुत पसंद है इसलिए प्रसाद भी मोदक और केले का ही होता है.

यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है जिसके कारण शहर के सभी हिस्सों में चहल-पहल बनी रहती है और जैसे-जैसे दिन बीते हैं वैसे-वैसे लोगों द्वारा भजन संध्या का आयोजन और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते है और खूब आनंद से इन कार्यक्रमों को देखते है.

गणेश चतुर्थी का महत्व –

हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए गणेश चतुर्थी का महत्व एवं उनके जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. गणेश उत्सव भारत के महाराष्ट्र में सबसे लोकप्रिय है यहां के लोग भगवान गणेश में बहुत आस्था रखते है. माना जाता है कि जो भी भगवान गणेश की प्रतिमा को अपने घर में लेकर आता है तब भगवान गणेश सुख और समृद्धि साथ में लाते है.

और जब भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जन के लिए लेके जाया जाता है तब माना जाता है कि भगवान गणेश अपने साथ घर के सभी दुखों को अपने साथ ले जाते है.

वर्तमान में लोग एक दूसरे को जानते नहीं है इसलिए गणेश उत्सव के माध्यम से लोग एक साथ इकट्ठा होते है जिससे लोग एक दूसरे को जानने लगते हैं और इससे लोगों के बीच में प्रेम भावना उत्पन्न होती है. यह खुशियों का त्यौहार है जिसके कारण लोग अपने मतभेद भुलाकर एक दूसरे से प्रेम पूर्वक बातें करते है. इस त्यौहार के कारण आपसी रिश्ते मजबूत होते है जो कि हमारे देश को एक जुट करता है.

गणेश चतुर्थी का एक अन्य महत्व भी है जिसने हमारे देश को आजादी दिलाने में भी सहयोग किया क्योंकि जब अंग्रेजों द्वारा भारतीय लोगों के एक साथ इकट्ठे और बैठने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

जिसके कारण लोग एक दूसरे से विचार विमर्श नहीं कर पा रहे थे क्योंकि धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने पर रोक नहीं लगाई गई थी इसलिए बड़ी ही चतुरता से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेश चतुर्थी के इस त्यौहार को एक बड़े उत्सव का रूप दे दिया जिसके बाद सभी संगठन इस उत्सव पर मिलने लगे और हमें इस से आजादी में बहुत मदद मिली.

गणेश विसर्जन –

गणेश उत्सव का आखरी दिन गणेश विसर्जन के रूप में जाना जाता है. यह गणेश उत्सव का 11 दिन होता है इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. इस दिन को सभी लोग बहुत शुभ मानते है क्योंकि भगवान गणेश सभी दुखों को हरने वाले माने जाते हैं इसलिए जब भी घर से उनकी विदाई की जाती है तब वे अपने साथ सभी दुखों को हर ले जाते है.

गणेश विसर्जन की तैयारियां खूब धूमधाम से की जाती है इस दिन लोगों द्वारा पांडाल में रंगोलियां बनाई जाती है. और बहुत बड़े भंडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी लोग पेट भर के प्रसाद ग्रहण करते है. लोगों द्वारा कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाते है.

सभी लोग अपने घरों में तरह-तरह की मिठाईयां बनाते है और खूब चाव से पूरे मोहल्ले में बांटते है और साथ ही गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे लगाते है.

गणेश विसर्जन के लिए एक सुंदर रथ बनाया जाता है जिसे रंग-बिरंगे फूलों द्वारा सजाया जाता है. भगवान गणेश की आरती करने के पश्चात उनकी प्रतिमा को रथ में बिठाया जाता है फिर पूरे शहर में शोभायात्रा निकाली जाती है इसके साथ ही कई रंग बिरंगी झांकियां भी शामिल की जाती है.

इस दिन सभी लोग अपना कामकाज छोड़कर इस उत्सव में भाग लेते हैं और रथ से बड़े-बड़े र से बंधे होते हैं जिनकी सहायता से भगवान गणेश की रथ को खींचा जाता है. इस दिन भगवान गणेश की शोभायात्रा निकालते समय खूब ढोल नगाड़े और पटाखे बजाए जाते है. आजकल लोगों द्वारा डीजे भी बजाया जाने लगा है.

इस उत्सव में सभी लोग एक दूसरे के ऊपर रंग-बिरंगे रंग उड़ाते है सभी लोग ढोल- नगाड़ो की ताल पर तरह-तरह की नृत्य करते है. इस उत्सव में लोग आनंद और हर्षोल्लास से भाग लेते है. आजकल भगवान गणेश विसर्जन के समय हेलीकॉप्टर द्वारा फूलों की वर्षा भी की जाती है जो कि एक मनोरम दृश्य है.

सभी लोगों द्वारा भगवान गणेश की शोभायात्रा निकालते समय खूब जोर जोर से गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे लगाए जाते है. इस उत्सव को लोग इतने साल से मनाते हैं कि इस दिन विसर्जन के लिए हर तरफ हर गली मोहल्ले में गणेश जी की ही प्रतिमा दिखाई देती है.

अंत में शहर के तालाब, समुंदर या नदी में भगवान गणेश की प्रतिमा का “ अगले वर्ष जल्दी आना” के नारों के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है इसके साथ ही यह उत्सव पूर्ण हो जाता है.

उपसंहार –

गणेश चतुर्थी का त्यौहार सुख और समृद्धि लाने वाला त्यौहार है इस त्यौहार के आने से सभी लोग खुश हो जाते है. यह त्योहार भारत के प्रत्येक हिस्से में मनाया जाता है जो कि इस त्यौहार की लोकप्रियता को दर्शाता है. त्योहारों के कारण ही आज हमारी संस्कृति को विदेशों में भी सराहा जाता है.

इन त्योहारों के कारण ही लोगों के एक दूसरे के प्रति मनमुटाव समाप्त हो जाते है. भगवान गणेश सभी के आराध्य देव है किसी भी शुभ कार्य के पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. इस उत्सव का आयोजन सांस्कृतिक सामाजिक और राष्ट्रीय एकता के लिए प्रमुख है.


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