बाघ पर निबंध – Essay on Tiger in Hindi

Essay on Tiger in Hindi : दोस्तों आज हमने हमारे देश की राष्ट्रीय पशु बाघ पर निबंध लिखा है बाघ के दिन प्रतिदिन बढ़ती प्रजाति एक चिंता का विषय है इसलिए इसके प्रति जागरूकता फैलाना बहुत अधिक जरूरी है.

इसीलिए विद्यार्थियों को परीक्षाओं, लेखन प्रतियोगिताओं आदि में पैराग्राफ और निबंध लिखना दिया जाता है विद्यार्थियों की सहायता के लिए हमने बाघ पर निबंध सरल भाषा में और अलग अलग सभी सीमाओं में लिखा है.

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10 line Essay on Tiger in Hindi


(1) बाघ एक चौपाया जानवर है.

(2) बाघ हमारे भारत देश का राष्ट्रीय पशु है.

(3) बाघ स्तनधारी जानवर है क्योंकि यह इंसानों की तरह ही बच्चों को जन्म देता है.

(4) बाघ मांसाहारी जानवर है.

(5) बाघ रात में शिकार करता है और दिन में सोता है.

(6) बाघ का शरीर 7 से 10 फीट तक लंबा होता है.

(7) भारतीय बाघ का शरीर का रंग पीले और भूरे रंग का मिश्रण होता है और उसके ऊपर काले रंग की धारियां होती है.

(8) बाघ के दो आंख और दो कान, एक लंबी पूछ होते है.

(9) बाघ जंगल, घास के मैदानों, वनों में अकेला रहना पसंद करता है.

(10) इसका मुख्य आहार चीतल, हिरण, जंगली सूअर, भैंस, सांभर, बकरी इत्यादि जानवर है.

Essay on Save Tiger in Hindi 250 words


बाघ एक स्तनधारी जानवर है जो कि जंगल में सबसे ताकतवर जानवर के रूप में जाना जाता है इसका शरीर 7 से 10 फुट लंबा होता है. बाघ की सबसे ज्यादा जनसंख्या हमारे देश भारत में ही पाई जाती है यह भारत के सुंदरवन जंगल में सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते है.

यह पशु देखने में सबसे सुंदर लगता है लेकिन यह जितना सुंदरता है उतना ही है खतरनाक है क्योंकि यह मांसाहारी होता है और जंगल के लगभग सभी जानवरों को मारकर खा सकता है जैसे की हिरण, गाय, बकरी, भैंस, चीतल आदि जानवर इसके प्रिय भोजन है.

यह मुख्य रूप से एशिया महाद्वीप पर ही पाया जाता है. एक दशक पहले बाघों का शिकार उनकी खाल और अन्य शरीर की हड्डियों के लिए किया जाने लगा इसलिए भारत सरकार ने बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया.

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इसके शरीर का रंग पीले और भूरे रंग का मिश्रण है और उसके ऊपर काले रंग की धारियां होती है इसके शरीर के पेट के नीचे वाले हिस्से का रंग और गांव के नीचे वाले हिस्से का रंग सफेद होता है.

इसकी दो आंखें और दो कान होते है यह इंसानों की तुलना में ज्यादा अच्छी तरह से देख सकता है और सुन भी सकता है. इसकी नाक की कोशिकाएं बहुत कोई भी दुर्गंध या सुगंध कई किलोमीटर दूर से ही सूंघ लेती है.

भारत सरकार ने इस के बढ़ते हुए शिकार को देखते हुए सन 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की घोषणा करते हुए इन्हें संरक्षण प्रदान किया था इसी कारण आज हमारे देश में अन्य देशों की तुलना में ज्यादा बाघ पाए जाते है.

Best Essay on Tiger in Hindi 400 words


बाघ हमारे देश की शान है क्योंकि यह जंगल के पशुओं में सबसे ताकतवर पशु है और इसकी सुंदरता इसके शरीर पर चार चांद लगा देती है इसीलिए भारत सरकार ने हमारे देश के राष्ट्रीय पशु के रूप में बांध चुना है. बाघ आमतौर पर जंगल में अकेला ही रहना पसंद करता है.

बाघ जंगल में झाड़ियों में घात लगा कर बैठा रहता है जब भी कोई जानवर वहां से गुजरता है तो यह उस पर हमला करके उसे मार गया देता है. यह सब एक प्राकृतिक प्रक्रिया है क्योंकि बाघ का मुख्य भोजन जंगल के अन्य सभी जानवर होते है कभी-कभी यह इंसानों के ऊपर भी हमला कर देता है.

बाघ मुख्य रूप से भारत, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान, कोरिया, कंबोडिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया इत्यादि देशों में पाया जाता है लेकिन इसी सबसे अधिक जनसंख्या भारत के सुंदरवन के जंगलों में पाई जाती है. भारत के बाघ को बंगाल टाइगर (Bengal Tiger) के रूप में भी जाना जाता है.

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एक व्यस्क बाघ का वजन 350 किलो से भी अधिक हो सकता है इसके बावजूद भी यह पानी में तैरने में माहिर होते है साथ ही यह 50 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते है लेकिन भारी शरीर होने के कारण यह अधिक दूरी तक नहीं छोड़ पाता है.

यह बहुत ही ताकतवर जानवर है क्योंकि यह एक बार किसी जानवर को अगर पकड़ लेता है तो फिर उसको छोड़ता नहीं है.

बाघ एक बार भी 20 से 25 किलो मांस खा जाता है. इसका रंग पीले और भूरे रंग का मिश्रण होता है और पूरे शरीर पर काली धारियां होती है जिसे झाड़ियों में घुल-मिल जाता है और किसी को आसानी से दिखाई नहीं देता है.

इसके मुंह के ऊपर वाले और नीचे वाले दोनों जबड़ो में दो-दो नुकीले दांत होते है जिसे अपने शिकार को मार गिराता है और उनका मांस फाड़ देता है.

बाघ की कुल 8 प्रजातियां पाई जाती है लेकिन उनमें से अब सिर्फ 6 प्रजातियां ही बची है जिनके नाम इस प्रकार है – बंगाल टाइगर, सुमात्रा बाघ, ईडो-चाइनीज़ बाघ, साइबेरियन बाघ, मलयान बाघ और दक्षिणी चीनी बाघ है.

बाघ की औसत आयु 25 से 30 वर्ष की होती है. मादा बाघ एक बार में दो से तीन शावकों को जन्म देती है. इसका गर्भाशय काल 115 से 120 दिन का होता है.

बाघ की घटती हुई संख्या को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सन 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत इन्हें संरक्षण प्रदान किया है.

Essay on Tiger in Hindi 1000 words


रूपरेखा –

बाघ बड़े शरीर वाला ताकतवर जानवर है जोकि हमारे देश भारत का राष्ट्रीय पशु भी है. इसकी सुंदरता और ताकत का मेल इसकी सुंदरता को और भी बढ़ा देता है. भारत में इसे बंगाल टाइगर के नाम से भी जाना जाता है इसका वैज्ञानिक नाम पेंथेरा टाइग्रिस है. बाघ की प्रजाति का डीएनए बिल्ली के डीएनए से मिलता है इसीलिए इसकी शारीरिक संरचना बिल्ली एक बड़ी बिल्ली की तरह दिखाई देती है.

बाघ की शारीरिक संरचना –

बाघ का शरीर बहुत ही हष्ट पुष्ट होता है इसके शरीर की लंबाई 7 से 10 फुट तक होती है और इसका वजन 350 किलो से भी अधिक हो सकता है. बाघ का मुंह चौड़ा होता है इसके दो बड़ी आंखें होती है आंखों का रंग पीला होता है काले रंग की पुतली होती है और दो छोटे कान होते है.

बाघ के शरीर का रंग पीला और भूरे रंग का मिश्रण होता है जिस पर काले रंग की धारियां पाई जाती है साइबेरिया. चीन में इसका रंग सफेद होता है. भारत के मध्य प्रदेश राज्य के रेवा नामक स्थान पर भी यह सफेद रंग में पाया जाता है.

इनके शरीर की पेट का नीचे का हिस्सा और पंजों के नीचे का हिस्सा सफेद रंग का होता है. इसके 3 फुट लंबी पुंछ होती है

बाघ के चार पैर होते है इसके पंजों के नीचे का हिस्सा गदीदार होता है साथ ही पंजों में नुकीले नाखून भी होते है. इसके एक नाक होती है इसके मुंह में के दोनों जबड़ो में दो-दो नुकीले दांत होते है.

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बाघ की विशेषता –

(1) बाघ 40 से 65 किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकते हैं लेकिन भारी शरीर होने के कारण है जल्द ही थक जाते है.

(2) बाघ का जीवनकाल 10 से 15 वर्ष का होता है लेकिन कुछ बांध 25 वर्ष की आयु तक भी जीवित रहते है

(3) बाघ झाड़ियों में छुप कर घात लगाकर अपना शिकार करता है.

(4) यह जंगल में ज्यादातर अकेला रहना ही पसंद करता है.

(5) बाघ शिकार में 20 प्रयासों में से सिर्फ एक प्रयास में ही सफल हो पाता है

(6) बाघ बिल्लियों की प्रजाति से ही आता है

(7) बाघ के शरीर में पाई जाने वाली काली धारियों का पैटर्न सभी बाघो में अलग अलग होता है जिससे इन्हें पहचाना जा सकता है यह कुछ इंसानों के हस्त चिन्ह (finger print) की तरह ही होता है.

(8) बाघ की पूंछ इसके दौड़ते समय मुड़ने पर इसके बैलेंस बनाने में सहायता करती है

(9) यह एक बार में 20 से 25 किलो तक मांस खा सकता है

(10) बाघ का गर्भकाल 95 से 115 दिन का होता है.

(11) मादा बाघ एक बार में 2 से 3 शावकों को जन्म देती है

(12) बाघ के बच्चे जन्म के 14 से 15 दिनों बाद आंख खोलते है.

(13) बाघ इंसानों की तरह पानी में भली प्रकार से तैर भी सकते है.

(14) बाघ के आगे के पैर की तुलना में पीछे के पैर बड़े होते है जिसकी सहायता से ही है एक बार में 20 से 30 फुट की छलांग लगा सकता है.

(15) बाघ की पैर गदीदार होते है जिसकी सहायता से यह जब भी शिकार करने जाता है तो इसके पैरों की आवाज नहीं होती है.

बागी की जीवन शैली –

बाघ जंगल में एकांत में रहना पसंद करता है यह भारत की लगभग सभी स्थानों पर पाया जाता है लेकिन सुंदरवन जंगल में यह सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है. यह झाड़ियों में छुप कर अपने शिकार का इंतजार करता है और शिकार के आते ही उस पर जोर से झपट्टा मार के उसका शिकार करता है.

एक बाघ अपना क्षेत्र निर्धारित करके रखता है अगर उसमें कोई और बाघ आता है तो उनकी लड़ाई भी हो जाती है यह मांसाहारी होता है इसलिए यह हिरण चीतल, भैंस, गाय, जंगली, सूअर, जिराफ, हाथी का बच्चा, इत्यादि का शिकार करता है.

बाघ की प्रजातियां –

बाघ की कुल 8 प्रजातियां पाई जाती है लेकिन वर्तमान में सिर्फ 6 (बंगाल टाइगर, सुमात्रा बाघ, ईडो-चाइनीज़ बाघ, साइबेरियन बाघ, मलयान बाघ और दक्षिणी चीनी बाघ ) प्रजातियां ही जीवित है. बांध की 3 (जवन बाघ, कैस्पियन बाघ और बाली बाघ) प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है.

हाल ही में चीन के बाघ की विलुप्त उप प्रजाति के डीएनए के अनुसार बाघ के पूर्वज मध्य चीन से भारत आए थे. बाघ की प्रजातियां भारत के अलावा भारत, नेपाल, बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन,भूटान, कोरिया, साइबेरिया, अफगानिस्तान और इंडोनेशिया में भी पाई जाती है.

भारतीय संस्कृति में बाघ का महत्व –

भारतीय संस्कृति में बाघ को मां दुर्गा के वाहन के रूप में देखा जाता है भारत के कई स्थानों पर इसकी पूजा भी की जाती है. यह भारत की प्राचीनतम सिंधु घाटी की सभ्यता की मुहर में चित्रित होने वाला मुख्य पशु है.

भारत द्वारा बाघ की प्रजाति को संरक्षण भी दिया गया है साथ ही इसे देश का सम्मान देते हुए राष्ट्रीय पशु की घोषित किया गया है. भारत में बांध की महत्वता इसी से पता लगा सकते हैं कि भारत के नोटों में और डाक टिकटों में भी इसे चित्रित किया गया है.

बाघ का संरक्षण –

बाघ पशुओं में सबसे अधिक संकटग्रस्त प्रजाति है क्योंकि इसका शिकार बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है साथ ही जनसंख्या बढ़ने के साथ इस के रहने का स्थान कम हो गया है इसलिए दिन प्रतिदिन इसकी संख्या में गिरावट आती जा रही है.

भारत सरकार ने बाघ की प्रजाति को बचाने के लिए बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया साथ ही वन्यजीव अधिनियम 1972 को लागू किया गया जिसके तहत अप्रैल 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर (बाघ परियोजना) की शुरुआत की गई.

इस परियोजना के तहत 27 आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई जिनका कुल क्षेत्रफल 37,761 वर्ग कि.मी. है. बाघ की सरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष 29 जुलाई को बाघ दिवस भी मनाया जाता है.

निष्कर्ष –

भांग हमारे देश के राष्ट्रीय पशु के साथ साथ हमारी शान भी है. यह जंगल का सबसे सुंदर और सबसे ताकतवर पशु है इसके बिना जंगल अधूरा है. बांध के अत्यधिक शिकार के कारण किसकी प्रजाति अब संकट में पड़ गई है इसलिए हमें बांध को बचाने का हर संभव प्रयास करना चाहिए.

हमें लोगों को बांध की विशेषता और महत्व बताकर इसकी रक्षा करनी होगी तभी जाकर भविष्य में आने वाली हमारी पीढ़िया बांध को देख पाएंगी.


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