Essay on Peacock in Hindi – भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर पर निबंध

दोस्तो आज हमने Essay on Peacock in Hindi लिखा है मोर पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए है. Peacock Essay in Hindi की सहायता से विद्यार्थी अपनी जानकारी बढ़ा सकते है. इस निबंध के माध्यम से हमने बताया है कि मोर कितना महत्वपूर्ण और पक्षी है इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी है और यह हमारे देश का राष्ट्रीय कब और क्यों बना.

Essay on Peacock in Hindi for Class 2

मोर भारत देश का राष्ट्रीय पक्षी है यह पक्षियों में सबसे सुंदर है. मोर का आकार सभी पक्षियों में सबसे बड़ा होता है. मोर आमतौर पर पीपल बरगद और नीम के पेड़ पर पाया जाता है मोर को ऊंची जगह पर बैठना बहुत पसंद है. मोर के इतना सुंदर होने के पीछे उसका कई रंगों से सुसज्जित होना है.

Essay on Peacock in Hindi

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मोर का मुंह है और गला बैंगनी रंग का होता है इसके पंखों का रंग हरा होता है जिसमें चांद जैसी बैंगनी, आसमानी, हरे, पीला, रंगों से बनी आकृति होती है.

मोर के पंख इतने कोमल होते हैं कि जैसे कि कोई मखमल का वस्त्र हो. मोर की गर्दन पतली और सुराहीदार जैसी होती है. मौत के पैरों का रंग मटमैला सफेद होता है. मोर की आंखें और मोहे छोटा होता है.

Peacock के बढ़ते शिकार के कारण भारत सरकार ने वन्य-जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत पूर्ण संरक्षण दिया है जिसके बाद मोरों की शिकार में कमी आई है.

Essay on National Bird Peacock in Hindi


मोर बहुत ही शांत और शर्मिला किस्म का पक्षी होता है. मोर हमेशा तीन -चार मोरों के साथ रहता है. मोर सामान्यतः पूरे भारत देश में पाया जाता है लेकिन इस की प्रजाति ज्यादा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा में फैली हुई है. मोर हमेशा इंसानों से दूर ही रहना पसंद करता है यह अक्सर बड़े पेड़ों की ऊंची डाल पर या फिर जंगलों में पाया जाता है.

मोर की आवाज बहुत तेज होती है जिसको 2 किलोमीटर दूर से ही सुना जा सकता है लेकिन इसकी आवाज कर्कस भरी होती है. मोर के शरीर का रंग चटक नीले और बैंगनी कलर का होता है.

यह पक्षियों में सबसे बड़ा पक्षी होता है इसके पंख बहुत बड़े होते हैं जिसके कारण यह ज्यादा दूरी तक उड़ने ही पाता है और यह है ज्यादातर चलना ही पसंद करता है.

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इसके पंख खोखले होते है साथ ही पंखों पर पेड़ों के पत्तों की तरह छोटी-छोटी पंखुड़ियां होती है, पंखों के अंत में चटक रंगों की चांद जैसी आकृति बनी होती है जो कि देखने में बहुत ही सुंदर लगती है. Peacock प्राकृतिक आपदा आने से पहले ही जोर-जोर से आवाज करके उसके बारे में अवगत करा देता है.

मोर बारिश के मौसम में बहुत खुश होता है और इतनी खुशी के कारण वह अपने पंख फैलाकर धीरे-धीरे गोल-गोल घूम कर नाचता है. मोर के नाचते समय के पंखों की आकृति आधे चांद के जैसी होती है. मोर इतना सुंदर पक्षी होता है कि इसको देख कर कोई भी मोहित हो सकता है.

Essay on Peacock in Hindi for Class 3, 4,5,6,7,8


मोर कई चटकीले रंगों से सुसज्जित एक सुंदर पक्षी होता है. मोर ज्यादातर सभी देश और विदेशों में पाया जाता है लेकिन सबसे सुंदर प्रजाति इसकी भारत देश में ही पाई जाती है. मोर का जीवनकाल 15 से 25 वर्ष की अवधि का होता है. मोर राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बहुतायत में पाया जाता है. मोर भोजन में अनाज, सब्जियां और कीट-पतंगों को खाता है इसके साथ-साथ समय आने पर वह जहरीले सांप को भी मार कर खा सकता है.

मोर के कानों की सुनने की क्षमता बहुत अधिक होती है एक छोटी सी भी आहट हो बहुत दूरी से सुन सकता है. मोर आम पक्षियों की तरह इंसानों के साथ घुलता मिलता नहीं है वह शर्मीले स्वभाव का होता है जिसके कारण वह ज्यादातर पेड़ों और जंगलों में ही पाया जाता है.

मोर पुल्लिंग होता है जबकि मोरनी स्त्रीलिंग होती है. मोर का शरीर नीली और बैंगनी रंग से सजा हुआ होता है, जब की मोरनी इतनी सुंदर नहीं होती है उसके बड़े-बड़े पंख भी नहीं होते हैं साथ ही वह भूरे और मटमैले सफेद रंग की होती है.

मोर बारिश के दिनों में बारिश आने से पहले ही जोर जोर से आवाज करके उसका संकेत दे देता है और साथ ही जब बारिश का मौसम आता है तो मोर अपने पंख फैलाकर ऐसे नाचता है कि मानो वह बारिश का स्वागत कर रहा हो.

मोर का नृत्य धीमी गति का होता है वह एक ही जगह पर पंख फैलाकर धीरे-धीरे घूमकर अपना नृत्य दिखाता है.

Peacock के सिर पर चांद जैसी आकृति में छोटी-छोटी पंखुड़ियां बनी हुई होती हैं लोगों के अनुसार यह उसका ताज है इसीलिए पक्षियों में इसे राजा कहा जाता है. मोर का वजन भारी होने के कारण यह है ज्यादा ऊंचाई तक और ज्यादा देर तक उड़ नहीं पाता है इसलिए यह ज्यादातर चलना ही पसंद करता है.

मोर बहुत अधिक सुंदर पक्षी है इसलिए इसके पंखों का इस्तेमाल सजावट के लिए भी किया जाता है और साथ ही इसके पंखों से कुछ दवाइयां भी बनाई जाती हैं इसलिए इसका शिकार बहुत अधिक बढ़ गया है इसलिए बार सरकार ने मोर को संरक्षण देते हुए वन्य अधिनियम 1972 के तहत इसके शिकार को गैरकानूनी करार कर दिया गया और शिकार करने पर सजा का प्रावधान भी है.

इस कानून के बनने के बाद मोर की शिकार में कुछ हद तक कमी आई है लेकिन लोग आप भी इसका शिकार कर रहे है.

Essay on Peacock Information in Hindi


मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है मोर को भारत का राष्ट्रीय पक्षी 26 जनवरी 1963 में घोषित किया गया था क्योंकि मोर भारत के सभी हिस्सों में पाया जाता है और यह देखने में भी बहुत सुंदर है साथ ही इसकी भारतीय परंपराओं और संस्कृति में इसकी झलक दिखाई देती है. मोर देखने में इतना सुंदर है कि कोई भी इसको एक बार देख ले तो इसकी सुंदरता पर मोहित हो जाता है.

मोर की अलग-अलग देशों में अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती हैं लेकिन सबसे सुंदर प्रजाति भारत में ही पाई जाती है. मोर पक्षियों में सबसे बड़ा पक्षी है और साथ ही यह वजन में भी सबसे भारी है. मोर का मुंह छोटा होता है लेकिन शरीर बहुत बड़ा होता है. मोर की गर्दन सुराही की तरह पतली और लंबी होती है.

मोर ज्यादातर शुष्क क्षेत्रों में ही रहना पसंद करता है इसलिए यह राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों में बहुतायत में पाया जाता है. मोर मौसम और वातावरण के अनुसार अपने आप को ढाल सकता है इसीलिए बर्फीले और पहाड़ी क्षेत्रों में भी बड़ी ही सहजता से अपना जीवन यापन करता है.

Peacock का वजन 5 से 10 किलो का होता है. यह सुंदर होने के साथ-साथ चतुर, सतर्क और शर्मीले स्वभाव का होता है यह ज्यादातर अकेले रहना ही पसंद करता है यह हमेशा इंसानों से एक निश्चित दूरी बनाए रखता है. उसके पैरों का रंग मटमैले सफेद रंग का होता है और इसके पंजे तीखे और नुकीले होते है.

इसके शरीर का रंग नीले और बैंगनी रंग से मिलकर बना होता है जो की बहुत ही चमकीला होता है. गर्दन के इस नीले रंग के कारण मोर को नीलकंठ भी कहा जाता है. इसकी आंखें छोटी और काले रंग की होती है. इसके सिर पर छोटे-छोटे पंखों का आधे चांद के आकार का ताज बना होता है

इसीलिए इसे पक्षियों का राजा भी कहा जाता है. मोर ज्यादातर हरियाली वाले क्षेत्र और खेतों में ही पाया जाता है और यह पानी के निश्चित स्त्रोत के पास अक्सर नजर आता है इसलिए यह भारतीय गांव में ज्यादा देखा जाता है. मोर किसानों का अच्छा दोस्त भी होता है क्योंकि यह फसलों में लगने वाले कीट-पतंगों को खा जाता है.

मोर का जीवनकाल 15 से 25 वर्ष का होता है इसके पंखों की लंबाई करीब 1 मीटर से भी ज्यादा होती है. मोर के लगभग 200 पंख होते हैं जिनके अंत में चांद के आकार की आकृति बनी हुई होती है जिसमें सतरंगी रंग भरे हुए होते है. इसके पंख खोखले होते हैं जिनको पुराने जमाने में स्याही में डुबोकर लिखने के काम में भी लिया जाता था. इसके पंख कितने कोमल होते हैं जैसे कि कोई मखमल का कपड़ा हो.

यह सामान्यत: ऊंचे पेड़ों की शाखाओं पर जैसे पीपल, बरगद, नीम पर ही बैठते है यह समूह में रहने वाला पक्षी है. मोर का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है क्योंकि मोर के पंख को भगवान श्री कृष्ण ने अपने सिर पर धारण किया हुआ है और मोर भगवान शिव के बेटे कार्तिक का वाहन भी है.

मुगल सम्राट शाहजहां ने मोर की सुंदरता से प्रभावित होकर मोर के पंखों की तरह ही सिहासन बनाने का आदेश दिया था यह सिहासन बनने में कुल 6 साल लगे इसमें देश और विदेश से लाकर बहुमूल्य रतन जड़े गए थे. सिहासन को तख्त ए ताऊस नाम दिया गया.

इसके हर साल नए पंख आते हैं और पुराने पंख झड़ जाते हैं उसके पंखों का उपयोग सजावटी गुलदस्तों, गर्मियों में हवा खाने के लिए हाथ पंखे बनाए जाते है और आजकल तो इसका उपयोग तरह-तरह की मॉडर्न डिज़ाइनों में भी उपयोग किया जाता है इसके साथ ही इसके पंखों से कुछ जड़ी बूटियां भी बनाई जाती है जिसके कारण इनके पंखों की बाजार में मांग रहती है.

इसीलिए लोग इनका शिकार करने लगे और धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होने लगी तब भारत सरकार ने मोर को संरक्षण देते हुए वन्य अधिनियम 1972 के तहत इसके शिकार पर रोक लगा दी अब अगर कोई शिकार करता है तो उसको जुर्माने के साथ कठोर कारावास की सजा होती है. लेकिन आज भी इस पक्षी का शिकार किया जाता है इस पर सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

मोर नर होता है जबकि मोरनी मादा होती है मोरनी दिखने में इतनी सुंदर नहीं होती है उसके बड़े-बड़े पंख भी नहीं होते हैं मोरनी के पंख छोटे होते हैं और उनका रंग भूरा घुसर होता है. यह शरीर में भी मोर से छोटी होती है. मोरनी के गर्दन का थोड़ा सा हिस्सा हरे रंग का पाया जाता है. मोरनी हर साल दो बार 4 से 5 अंडे देती है जिनमें से एक या दो ही सही सलामत रह पाते है.

भारत में जब मानसून आता है तो मोर बहुत खुश होता है और वह खुश होकर अपने पंखों को फैलाकर धीमी गति से नाचता है जो कि देखने में बहुत ही सुंदर लगता है साथ ही जल्दी से मादा मोरनी को खुश करना होता है तो यह उसके सामने पंख फैलाकर नाचता है यह नृत्य करते समय नाचने में इतना मगन हो जाता है कि उसे आसपास क्या हो रहा है इसका पता नहीं रहता है और शिकारी इसी का फायदा उठाकर मोर को पकड़ लेते है.

मोर पक्षी इतना सतर्क होता है जी जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो उसका उसे पहले ही पता चल जाता है और वह तेज आवाज में आवाज करके सभी पक्षियों और लोगों को इस बारे में सूचित कर देता है आपने देखा होगा भी कई बार भूकंप आने से पहले और तेज आवाज में बोलने लग जाता है.

मोर पक्षी चतुर भी होता है वह रात को या फिर उसे जब भी खतरा महसूस होने पर वह पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर जाकर बैठ जाता है जिसे शिकारी उसका शिकार नहीं कर पाते है.

मोर पर कवियों द्वारा कविताओं के माध्यम से इसकी सुंदरता का जिक्र किया गया है और साथ ही भारत की पुरानी संस्कृति में इसकी झलक दिखाई देती है

मोर हमारे भारत देश की आन-बान और शान है कृपया इसका शिकार होने से बचाएं क्योंकि दिन-प्रतिदिन इनकी संख्या कम होती जा रही है इसलिए लोगों को मोर के महत्व के बारे में आप लोग अवगत कराएं.


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