4+ Poem on Peacock in Hindi – मोर पर कविता

Poem on Peacock in Hindi : दोस्तों आज हमने मोर पर कविता कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 & 8 के विद्यार्थियों के लिए लिखा है।

अक्सर छोटे बच्चों को स्कूलों में कविताएं पढ़ाई जाती हैं फिर उन्हें घर से कविताएं लिखने को कहा जाता है, उनकी सहायता के लिए हमने बच्चों के लिए रोचक कविताएं लिखी है।

Poem on Peacock in Hindi

Get Some Latest Poem on Peacock in Hindi for Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 & 8 Student.

Best Poem on Peacock in Hindi


(1)

नाच नाच कर आता मोर,
नाना रंग दिखाता मोर।
बच्चों को बहलाता मोर,
बाग बाग उड़ जाता मोर।।

वन वन शोभित होता मोर,
सावन में खुश होता मोर।
सुन सुनकर बादल का शोर,
अपना नाच दिखाता मोर।।

कितने सुंदर पंख है देखो,
पंख में कितने रंग है देखो।
रंग में कितने ढंग है देखो,
नाच मनोहर इसका देखो।।

Poem About Peacock in Hindi


(2)

मैं हूं राष्ट्रीय पक्षी मोर,
मेघ देखकर करता शोर।
गर्दन लंबी रंग है नीला,
दिखता हूं मैं बड़ा चमकीला।।

सुंदर पंख बड़े-बड़े है मेरे,
नागराज भी मुझ से डरे।
पंजे है मेरे शक्तिशाली,
दिखता हूं मैं सबसे निराला।।

पीहू पीहू की आवाज लगाकर,
सबको करता हूं सचेत।
ऊंचे ऊंचे पेड़ों पर में बैठता,
बिन मेरे बाग हो जाते सुने।।

नाच देख कर मेरा,
सब हो जाते अचंभित।
पंखो से मेरे लिखते हैं गाथा,
सबसे सुंदर पक्षी मैं कहलाता।।

Mor Par Kavita Hindi


(3)

कितनी सुंदर कितनी प्यारी,
सबसे मनहर सबसे न्यारी।
काले बादल छाते हैं जब,
झूम-झूम कर आते हो तब।।

जब है बादल घिर घिर आते,
पंख फैला तुम नाच दिखाते।
बरखा का संदेशा लाते,
सबके मन को हर्षाते।।

कैसा रूप है तुमने पाया,
रंग मनोहर है छिटकाया।
सिर पर सुंदर ताज सजाया,
तभी तो पक्षी-राज कहलाया।।

Nach Mor ka Sabko Bhata Poem


(4)

नाच मोर का सबको भाता,
जब वो पंखों को खोलकर इठलाता।
सबके मन को भाता,
पीहू-पीहू आवाज लगाता।।

जंगल और बागों में शोर मचाता,
जब आते मेघ घिर-घिर के।
वो घूम-घूम कर नाच दिखाता,
सबके मन को हर्षाता।।

सिर पर ताज लगाकर इठलाता,
हर वक्त रहता है चौकन्ना।
एक डाल से दूसरी डाल पर उड़कर जाता,
पंखों को फैला कर सुंदर रूप दिखाता।।

बाग-बगीचों में अक्सर आता,
शोर मचाने पर उड़ जाता।
पास बुलाने पर नहीं आता,
नाच मोर का सबको भाता।।

New Poem on Peacock in Hindi


(5)

झूम झूम के जब मैं नाच दिखाता,
सब कोई और मेरी ओर खिंचा चला आता।
स्वभाव का हूं मैं थोड़ा शर्मीला,
अपने सुंदर रंग से सबका मन मोह लेता।।

आती जब कोई काली बदरा,
तो पंख खोल कर मैं अपना।
सुंदर नाच दिखाता,
बड़े-बड़े पंख है मेरी पहचान।।

ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर मैं हूं रहता,
शान से अपने पंखों को लहराता।
पक्षियों को राजा मैं कहलाता,
सचेत मैं हरदम रहता।।

सुबह शाम मैं वन में भ्रमण करता,
सिर पर ताज मेरा आभूषण कहलाता।
चटक चमकीला नीला रंग है मेरा,
मैं भारत का राष्ट्रीय पक्षी कहलाता।।


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