7+ प्रकृति पर कविता – Poem on Nature in Hindi

Poem on Nature in Hindi : दोस्तों आज हमने प्रकृति पर कविता कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12 के विद्यार्थियों के लिए लिखा है। प्रकृति की सुंदरता देखते ही बनती है हरी-भरी प्रकृति के कारण ही हमारा जीवन इतना अच्छा सरल और सुलभ है।

प्रकृति से ही हमें हवा, जल, फल, सब्जियां, जड़ी बूटियां और जीवन जीने के लिए सभी प्रकार की वस्तुएं में उपलब्ध करवाती है।

प्रकृति हमेशा हमें कुछ ना कुछ देती ही रहती है, लेकिन मानव अपनी सफलता के नशे में प्रकृति का विनाश करता जा रहा है जिसके कारण पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवो का जीवन मुश्किल हो गया है। हमें प्रकृति को बचाना होगा नहीं तो हम भी नहीं बचेंगे।

हमें भी प्रकृति की तरह देना सीखना चाहिए, अगर हमें भविष्य को सुंदर बनाना है तो प्रकृति का संरक्षण जरूरी है इसीलिए प्रकृति की रूपरेखा को हमने कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है।

poem on nature in hindi

Get Some Latest Poem on Nature in Hindi for Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12.

Best Poem on Nature in Hindi


(1) Prakriti ki Lila Nayari Poem in Hindi 

प्रकृति की लीला न्यारी,
कहीं बरसता पानी, बहती नदियां,
कहीं उफनता समंद्र है,
तो कहीं शांत सरोवर है।

प्रकृति का रूप अनोखा कभी,
कभी चलती साए-साए हवा,
तो कभी मौन हो जाती,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी गगन नीला, लाल, पीला हो जाता है,
तो कभी काले-सफेद बादलों से घिर जाता है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी सूरज रोशनी से जग रोशन करता है,
तो कभी अंधियारी रात में चाँद तारे टिम टिमाते है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी सुखी धरा धूल उड़ती है,
तो कभी हरियाली की चादर ओढ़ लेती है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कहीं सूरज एक कोने में छुपता है,
तो दूसरे कोने से निकलकर चोंका देता है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

– नरेंद्र वर्मा

(2) Hey Prakriti Kaise Batau Tu Kitni Payari


हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
हर दिन तेरी लीला न्यारी,
तू कर देती है मन मोहित,
जब सुबह होती प्यारी।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
सुबह होती तो गगन में छा जाती लाली मां,
छोड़ घोसला पंछी उड़ जाते,
हर दिन नई राग सुनाते।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कहीं धूप तो कहीं छाव लाती,
हर दिन आशा की नई किरण लाती,
हर दिन तू नया रंग दिखलाती।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कहीं ओढ़ लेती हो धानी चुनर,
तो कहीं सफेद चादर ओढ़ लेती,
रंग भतेरे हर दिन तू दिखलाती।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कभी शीत तो कभी बसंत,
कभी गर्मी तो कभी ठंडी,
हर ऋतू तू दिखलाती।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कहीं चलती तेज हवा सी,
कही रूठ कर बैठ जाती,
अपने रूप अनेक दिखलाती।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कभी देख तुझे मोर नाचता,
तो कभी चिड़िया चहचाती,
जंगल का राजा सिह भी दहाड़ लगाता।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
हम सब को तू जीवन देती,
जल और ऊर्जा का तू भंडार देती,
परोपकार की तू शिक्षा देती,
हे प्रकृति तू सबसे प्यारी।

– नरेंद्र वर्मा

(3) Hindi Kavita on Nature


हरी हरी खेतों में बरस रही है बूंदे,
खुशी खुशी से आया है सावन,
भर गया खुशियों से मेरा आंगन।

ऐसा लग रहा है जैसे मन की कलियां खिल गई,
ऐसा आया है बसंत,
लेकर फूलों की महक का जशन।

धूप से प्यासे मेरे तन को,
बूंदों ने भी ऐसी अंगड़ाई,
उछल कूद रहा है मेरा तन मन,
लगता है मैं हूं एक दामन।

यह संसार है कितना सुंदर,
लेकिन लोग नहीं हैं उतने अकलमंद,
यही है एक निवेदन,
मत करो प्रकृति का शोषण।

– अज्ञात 

(4) Poem on Prakriti in Hindi


वन, नदियां, पर्वत व सागर,
अंग और गरिमा धरती की,
इनको हो नुकसान तो समझो,
क्षति हो रही है धरती की।

हमसे पहले जीव जंतु सब,
आए पेड़ ही धरती पर,
सुंदरता संग हवा साथ में,
लाए पेड़ ही धरती पर।

पेड़ -प्रजाति, वन-वनस्पति,
अभयारण्य धरती पर,
यह धरती के आभूषण है,
रहे हमेशा धरती पर।

बिना पेड़ पौधों के समझो,
बढ़े रुग्णता धरती की,
हरी भरी धरती हो सारी,
सेहत सुधरे धरती की।

खनन, हनन व पॉलीथिन से,
मुक्त बनाएं धरती को,
जैव विविधता के संरक्षण की,
अलख जगाए धरती पर।

– रामगोपाल राही

(5) Short Hindi Poems on Nature


सूरज निकला गगन में दूर हुआ अंधियारा,
पेड़ों ने ली अंगड़ाई, ठंडी ठंडी हवा चलाई,
पक्षियों ने भी नभ में छलांग लगाई।

हरे-भरे बागानों में रंग बिरंगे फूल खिले,
फूलों ने अजब सी महक फैलाई,
तितली, भंवरों को वो खींच लाई।

रसपान कर फूलों का सबने मौज उड़ाई,
देख प्रकृति की सुंदरता को,
कोयल भी धीमे-धीमे गुनगुनाए।

रंग बदलती प्रकृति हर पल मन को भाए,
नभ में कभी बादल तो कभी नीला आसमां हो जाए,
रूप तेरा देख कर हर कोई मन मोहित हो जाए।

झील, नदियां मीठा जल पिलाएं,
पर्वत हमें ऊंचाई को छुना सिखाएं,
प्रकृति हमें सब से प्रेम करना सिखाए।

रात के अंधियारे में चांद भी अपनी कला दिखाएं,
सफेद रोशनी से प्रकृति को रोशन कर जाए,
तारे भी टिमटिमा कर नाच दिखाएं।

प्रकृति हमें रूप अनेक दिखाती,
एक दूसरे से प्रेम करना सिखाती,
यही हमें जीवन का हर रंग बतलाती।

– नरेंद्र वर्मा

(6) Prakriti Se Perm – Poem on Nature in Hindi


आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें,
भूमि मेरी माता है,
और पृथ्वी का मैं पुत्र हूं।

मैदान, झीलें, नदियां, पहाड़, समुंद्र,
सब मेरे भाई-बहन है,
इनकी रक्षा ही मेरा पहला धर्म है।

अब होगी अति तो हम ना सहन करेंगे,
खनन-हनन व पॉलीथिन को अब दूर करेंगे,
प्रकृति का अब हम ख्याल रखेंगे।

हम सबका जीवन है सीमित,
आओ सब मिलकर जीवन में उमंग भरे,
आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

प्रकृति से हम है प्रकृति हमसे नहीं,
सब कुछ इसमें ही बसता,
इसके बिना सब कुछ मिट जाता।

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

– नरेंद्र वर्मा

(7) Lali hai Hariyali Hai Poem in Hindi


लाली है, हरियाली है,
रूप बहारो वाली यह प्रकृति,
मुझको जग से प्यारी है।

हरे-भरे वन उपवन,
बहती झील, नदिया,
मन को करती है मन मोहित।

प्रकृति फल, फूल, जल, हवा,
सब कुछ न्योछावर करती,
ऐसे जैसे मां हो हमारी।

हर पल रंग बदल कर मन बहलाती,
ठंडी पवन चला कर हमे सुलाती,
बेचैन होती है तो उग्र हो जाती।

कहीं सूखा ले आती, तो कहीं बाढ़,
कभी सुनामी, तो कभी भूकंप ले आती,
इस तरह अपनी नाराजगी जताती।

सहेज लो इस प्रकृति को कहीं गुम ना हो जाए,
हरी-भरी छटा, ठंडी हवा और अमृत सा जल,
कर लो अब थोड़ा सा मन प्रकृति को बचाने का।

– नरेंद्र वर्मा


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