Poems on Rain in Hindi – सर्वश्रेष्ठ वर्षा ऋतु पर 10 कविताएँ

Poems on Rain in Hindi – वर्षा ऋतु पर 10 कवितायेँ : दोस्तों आज हम आपके साथ वर्षा ऋतु पर लिखी गई सर्वश्रेष्ठ कविताएं शेयर करने जा रहे है. Poems on Rain in Hindi बहुत ही अच्छे लेखकों द्वारा लिखी गई है. Varsha Ritu पर लिखी गई यह कविताएं सभी कक्षा और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए वर्षा ऋतु पर कविता लिखने में सहायक होंगी.

Poems on Rain in Hindi

Top 10 Best Poems on Rain in Hindi

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दोस्तों बारिश का मौसम सभी को चाहे वह बच्चे हो या बड़े हो सभी को पसंद आता है क्योंकि इस समय चारों और हरियाली छा जाती है और गर्मी से राहत देने के लिए ठंडी ठंडी हवाएं चलती हैं जो कि सभी के मन को भाती है.

यह मौसम कितना सुहावना होता है कि सभी कुछ ना कुछ गाना चाहते है और स्कूल के विद्यार्थियों को शिक्षकों द्वारा “Poems on Rain in Hindi” के मौसम पर कविताएं लिखने को दी जाती हैं

इसलिए हमने विद्यार्थियों की सहायता के लिए बारिश (Rain) पर 10 सर्वश्रेष्ठ कविताओं का संग्रह किया है इन कविताओं की सहायता से विद्यार्थी नई कविताएं बना सकते हैं और अपने विचारों को व्यक्त कर सकते है

(1) Best Poems on Rain in Hindi – Varsha Bhaar sabke man ko lubha rhi hai

वर्षा बहार सबके मन को लुभा रही है ।
उमड़-घुमड़ कर काले बदरा छा रहे है ।।

चपला भी चमक कर रोशनी बिखेर रहे है ।
गुड़-गुड़ कर के बादल भी गरज रहे है ।।

ठंडी-ठंडी हवा चल रही मन को भा रही है ।
बागों में लताओं पर फूल खिल रहे है ।।

मदमस्त मोर पीहू पीहू करके नाच रहा है ।
कोयल भी मस्त राग सुना रही है ।।

मेंढक भी प्यारे संगीत गा रहे है ।
बाज भी बादलों के ऊपर उड़ान भरकर इतरा रहा है ।।

कल कल करती नदियां, इठलाती हुई बह रही है ।
मानो कोई नया संगीत सुना रही है ।।

बागों में फूल खिल रहे, सुगंध मन को भा रही है ।
सावन में झूले पर झूल रही है बिटिया ।।

वर्षा बहार भू पर जीवन की ज्योति जला रही है ।
वर्षा बहार सबके मन को लुभा रही है ।।

– नरेंद्र वर्मा


(2) Varsha Ke Swagat me – Rain Poem in hindi

वर्षा के स्वागत में तोते
उड़ते नभ में खुश होते

सारस ऊंची टेर लगाते
दूर -दूर तक उड़ते जाते

कुहू-कुहू कर रहे पपीहे
नव साहस भर रहे पपीहे

रही न पीछे कहीं टिटहरी
सखी बनी वर्षा की गहरी

बता रहे बच्चे बकरी के
उछल-कूद के नए तरीके

फुदक रही चिड़िया की टोली
बादल है सबके हमजोली

ताक रही बच्चो की बारी
नाव चलाने की तैयारी

बादल बरसे लगा ठहाके
आसमान में बगुले झांकें

– डॉ. जगदीशचंद्र शर्मा


(3) Varsha Ritu Poem in Hindi – Varsha Aayi Bhaar Aayi

वर्षा आई बहार आयी,
प्रकृति ने अपनी कृपा बरसाई ।
पेड़ पौधों में हरे भरे रंगों में रंग कर अपनी खुशी दर्शाई ।।

वर्षा आई बहार आयी,
किसानों के लिए लहराती फसल का संकेत लाई ।
प्रेमियों के मन में प्रेम की ज्योत जलाई ।।

वर्षा आई बहार आयी,
मन आनंद से झूम उठा ।
वह प्रफुल्लित हो कर खुशियों से फूल उठा ।।

वर्षा आई बहार आयी,
जीवन का सारा दुख दर्द ना जाने कहां गुम हो गया ।
वर्षा आई बहार आयी ।।

– विष्णु


(4) Rimjhim – Rimjhim si Bunde jag ke Aangan Aayi Poem in Hindi

रिमझिम रिमझिम सी बूंदे जग के आंगन में आयी ।
अपने लघु उज्जवल तन में कितनी सुंदरता लायी ।।

मेघों ने गरज-गरज कर मादक संगीत सुनाया ।
इस हरी-भरी संध्या ने हमको उन्मत्त बनाया ।।

सूखी सरिताओं ने फिर सुंदर नवजीवन पाया ।
लघु लहर लहर पर देखो सौंदर्य नाचने आया ।।

वन उपवन पनप गए सब कितने नव अंकुर आए ।
वे पीले पीले पल्लव फिर से हरियाली लाएं ।।

वन में मयूर अब नाचे हंस हंस आनंद मनाएं ।
उनकी छवि देख रही है नव सी घनघोर घटाएं ।।

प्रतिपल हम नाचे खेलें जगजीवन मधुर बनाए ।
अपने छोटे से घर में सुख का संसार बसाएं ।।

– अज्ञात


(5) Barish (Rain) ka Mausam Aaya Poem in Hindi

बारिश का मौसम है आया ।
हम बच्चों के मन को भाया ।।

‘छु’ हो गई गरमी सारी ।
मारें हम मिलकर किलकारी ।।

काग़ज़ की हम नाव चलाएँ ।
छप-छप नाचें और नचाएँ ।।

मज़ा आ गया तगड़ा भारी ।
आँखों में आ गई खुमारी ।।

गरम पकौड़ी मिलकर खाएँ ।
चना चबीना खूब चबाएँ ।।

गरम चाय की चुस्की प्यारी ।
मिट गई मन की ख़ुश्की सारी ।।

बारिश का हम लुत्फ़ उठाएँ ।
सब मिलकर बच्चे बन जाएँ ।।

– दीनदयाल शर्मा


(6) Umad Ghumad Bhar Aaye Badra Aasman me Chaaye

उमड़-घुमड़ भर आए बदरा आसमान में छाए ।
छप-छप टप-टप बरसते मेघा ।।

घनन घनन घन गरजते बादल ।
बिजली चमकती जाए ।।

घनघोर अंधेरा सब और छाया ।
मेघा ऐसे जमकर बरसे ।।

सूखी नदियां कल-कल करती बहने लगी ।
सुख की बगिया फूलों की सुगंध से महक उठी ।।

चारों और हरियाली ही हरियाली छाई ।
किसानों के चेहरे चमक उठे ।।

उमड़-घुमड़ भर आए बदरा आसमान में छाए ।
सर सर टप टप बरसते मेघा ।।

धरती मां भी झूम उठी ।
सब और ठंडी हवा चलने लगी ।।

उमड़-घुमड़ भर आए बदरा आसमान में छाए ।।

– नरेंद्र वर्मा


(7) Rimjhim – Rimjhim Barish Aayi Poem in Hindi

रिमझिम रिमझिम बारिश आई,
काली घटा फिर है छाई ।।

सड़कों पर बह उठा पानी,
कागज़ की है नाव चलानी ।।

नुन्नू-मुन्नू-चुन्नू आए,
रंग-बिरंगे छाते लाए ।।

कहीं छप-छप, कहीं टप-टप,
लगती कितनी अच्छी गपशप ।।

रिमझिम बारिश की फौहारें,
मन को भातीं खूब बौछारें ।।

बारिश की यह मस्ती है,
हो चाहे कल छुट्टी है ।।

– अमृता गोस्वामी


(8) Poems on Rain in Hindi – Aayi Re Aayi Varsha Ritu Aayi

आयी रे आयी वर्षा ऋतु आयी ।
अपने साथ काले काले मेघा लायी ।।

जोर जोर से गरज उठे काले मेघा ।
फिर कही बारिश की बौछारे आयी ।।

जोर जोर से उमड़ घुमड़ कर बरसे बदरा ।
सूखे खेतो में फसले लहराई ।।

धरती पुत्र किसानो की आँखे चमक उठी ।
घर घर में खुशियाँ आयी ।।

हाहाकार मचा रही गर्मी को धुल चटाई ।
आयी रे आयी वर्षा ऋतु आयी ।।

नवजीवन की नई जोत जलाई ।
पर्वत भी झूम उठा झरने भी झूम उठे ।।

खुले मैदानो फिर नदियाँ कल-कल कर बहने लगी ।
धरती माँ ने भी हरियाली की चुनरी ओढ ली ।।

आयी रे आयी वर्षा ऋतु आयी ।।

– नरेंद्र वर्मा


(9) Barish Poem in Hindi – Nani Aaj Mujhe Batlana

नानी आज मुझे बतलाना ।
कहां से आती वर्षा पानी ।।

सोच न पाओ समझ न पाओ ।
है वर्षा की यहां मनमानी ।।

ऊपर नीला आसमान है ।
सब है सूरज चांद सितारे ।।

पानी फिर यहां कहां से आया ।
समझ ना आई बात हमारे ।।

सूरज की किरणें धरती पर अपने संग गर्मी लाती ।
गर्मी जल को भाप बनाकर ।।

आसमान तक जा पहुंचाती ।
ऊपर आसमान में जाकर ।।

भाप से काले बादल बनते ।
उमड़-घुमड़ यह बादल ही ।।

खूब गरजते खूब बरसते ।
ऐसे ही पानी से बादल ।।

बादल से फिर बनता पानी ।
अब तो जान गई बिटिया तुम ।।

कहां से आती वर्षा पानी ।।

– आश्रिता दासारी


(10) Varsha Ritu Par Kavita – Varsha Ritu Tu Rituao ki Rani Hai

वर्षा ऋतु तू ऋतुओ की रानी है ।
तेरे न आने से हाहाकार मच जाता ।।

तेरे बिना जीवन संकट में पड़ जाता ।
चहु और त्राहि त्राहि मच जाती ।।

तेरे बिना सब नदी नाले और तालाब सुख जाते ।
सब प्राणियों का जीवन तुझ से है ।।

तेरे बिना जल, अन्न, जीवन असंभव है ।
वर्षा ऋतु तू सबसे सुहावनी और जीवनदायनी है ।।

तेरे आने से सुखा बीज भी अंकुरित हो उठता है ।
तेरे आने से बागानों के फुल खिल उठते है ।।

वर्षा तू जब आती है धरा की प्यास भूझ जाती है ।
धरती पुत्र के मुंह पर मुस्कान आ जाती है ।।

तेरे आने से जीवन की रेलगाड़ी दौड़ने लग जाती है ।
वर्षा ऋतु तू ऋतुओ की रानी है ।।

– नरेंद्र वर्मा


(11) Rain Poem in Hindi – Mere Bachpan ki Barish Badi ho Gyai

मेरे बचपन की बारिश बड़ी हो गयी..!

ऑफिस की खिड़की से जब देखा मैने,मौसम की पहली बरसात को….
काले बादल के गरज पे नाचती, बूँदों की बारात को…

एक बच्चा मुझसे निकालकर भागा था भीगने बाहर…
रोका बड़प्पन ने मेरे, पकड़ के उसके हाथ को…!

बारिश और मेरे बचपने के बीच एक उम्र की दीवार खड़ी हो गयी…
लगता है मेरे बचपन की बारिश भी बड़ी हो गयी..

वो बूँदें काँच की दीवार पे खटखटा रही थी…
मैं उनके संग खेलता था कभी, इसीलिए बुला रही थी..
.
पर तब मैं छोटा था और यह बातें बड़ी थी…
तब घर वक़्त पे पहुँचने की किसे पड़ी थी…

अब बारिश पहले राहत, फिर आफ़त बन जाती है…
जो गरज पहले लुभाती थी,वही अब डराती है….

मैं डरपोक हो गया और बदनाम सावन की झड़ी हो गयी…
लगता है मेरे बचपन की बारिश भी बड़ी हो गयी..

जिस पानी में छपाके लगाते, उसमे कीटाणु दिखने लगा…
खुद से ज़्यादा फिक्र कि लॅपटॉप भीगने लगा…

स्कूल में दुआ करते कि बरसे बेहिसाब तो छुट्टी हो जाए…
अब भीगें तो डरें कि कल कहीं ऑफिस की छुट्टी ना हो जाए…

सावन जब चाय पकोड़ो की सोहबत में इत्मिनान से बीतता था,
वो दौर, वो घड़ी बड़े होते होते कहीं खो गयी..

लगता है मेरे बचपन की बारिश भी बड़ी हो गयी..

– अभिनव नागर


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