Hindi Poem on Betiyan | बेटी पर कविता

Hindi Poem on Betiyan: आज हम कुछ नई कविताएँ ले कर आये है जो की बेटियों पर लिखी गई है। इन कविताओं के माध्यम से हम यह बताना चाहते है की बेटी समाज और संसार के लिए क्या क्या करती है फिर भी उसे वो मान सम्मान नहीं मिलता जो इस पुरुष प्रधान समाज में एक पुरुष को मिलता है।

बेटियों का जन्म होना तो ऐसे मान लिया जाता है जैसे कोई बहुत बड़ी विपदा आ पड़ी हो, लेकिन उन्हें क्या पता आप ने भी जब जन्म लिया होगा तो किसी की बेटी (Beti) की कोख से ही लिया होगा।

Hindi Poem on Betiyan

Betiyan तो आने वाला सुनहरा कल होती है, उनकी हमेशा इज्जत करनी चाहिए और सम्मान देना चाहिए। आज पुरुष प्रधान समाज होने के बावजूद भी बेटियां पुरुषो के साथ हर छेत्र में कंधे से कंधा मिला कर चल रही है बल्कि उनसे कही ज्यादा अच्छा काम कर रही है।

बेटियों पर कविताएँ – Beti Par Kavita (Poem)

#1 Poem on Beti 

kya likhu ki betiyan pari hoti hai

“बेटियां”

कि क्या लिखु की वो परियो का रूप होती है
या कड़कती सर्दियों में सुहानी धुप होती है

वो होती है चिड़िया की चचाहट की तरह
या कोई निश्चिल खिलखलाहट

वो होती है उदासी के हर मर्ज की दवा की तरह
या उमस में शीतल हवा की तरह

वो आंगन में फैला उजाला है
या गुस्से में लगा ताला है

वो पहाड़ की चोटी पर सूरज की किरण है,

वो जिंदगी सही जीने का आचरण है
है वो ताकत जो छोटे से घर को महल कर दे

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वो काफिया जो किसी गजल को मुकम्बल कर दे
जो अक्षर ना हो तो वर्ण माला अधूरी है

वो जो सबसे ज्यादा जरूरी है
ये नही कहूँगा कि वो हर वक्त सास-सास होती है
क्योंकि बेटियां तो सिर्फ अहसास होती है

उसकी आँखे ना गुड़ियाँ मांगती ना कोई खिलौना
कब आओगे, बस सवाल छोटा सा सलोना

वो मुझसे कुछ नही मांगती
वो तो बस कुछ देर मेरे साथ खेलना चाहती है

जिंदगी न जाने क्यों इतनी उलझ जाती है
और हम समझते है बेटियां सब समझ जाती है

– शलेश लोढ़ा

#2 Beti Par Kavita 


Beti Par Kavita

“जिम्मेदारियों का बोझ”

जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पर पड़ा तो
ऑटो, रिक्शा, ट्रेन को चलाने लगी बेटियां

साहस के साथ अंतरिक्ष तक बेध डाला
सुना वायुयान भी उड़ाने लगी बेटियाँ

और कितने उदाहरण ढूंढ कर लाऊ
हर शक्ति क्षेत्र आजमाने लगी बेटियाँ

वीर की शहादत पर अर्थी को कांधा देके
अब श्मशान तक जाने लगी बेटियां

घर में बंटा के हाथ रहती है माँ के साथ
पिता की हर एक बांधा हरती है बेटियाँ

कटु बोल बोलने से पहले सोचती है खूब
मन में डरती सहमती है बेटियाँ

बेटे हो भले उद्दण्ड भले दुखा दे आप का दिल
कष्ट सह के भी धैर्य धरती है बेटियाँ

प्रश्न ये ज्वनशील सब के लिए आज
नित्य प्रति कोख में क्यों मरती है बेटियाँ

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– कविता तिवारी

#3 Poem on Betiyan


mera kya kasur beti

“न जाने बेटियों का क्या कसूर है”

माश्रे का तो ये दस्तूर है
न जाने बेटियों का क्या कसूर है

माँ बाप भी बेटियों की विदाई के लिए मजबूर है
लाड से पाल के दुसरो के हवाले करना बस यही एक जिंदगी का उसूल है

बड़ी चाहतो से तो विदा कर के लाते है दुसरो की बेटियों को अपने घर
कुछ ही अर्शे में वो सब चाहते चकना चूर है

फिर कुछ दिन में किसी की बेटी दिन रात के लिए
आप के लिए फ़क्त एक मजदूर है

मेरी माँ ने तो बड़ी उम्मीद से तुम्हारे हवाले किया था
तुमने भी तो साथ देने का वादा किया था

मेरी आँखों में आंसू ना आने देने का इरादा भी किया था
न जाने फिर अब हर बात पर तुम्हे ये लगता है कि बस मेरा ही कसूर है

बस मेरे ही दिमाग में फितूर है
मेरे मामले में आकर क्यों हर रिश्ता मजबूर है

माश्रे का तो बस यही एक दस्तूर है
क्या बेटी बन के आना ये मेरा कसूर है

– अज्ञात

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Best and New Hindi Poem on Betiyan


#4 बेटी पर कविता 

“बेटी हूँ मै बेटी तारा बनुगी”

बेटी हूँ मै बेटी तारा बनुगी
तारा बनुगी मै सहारा बनुगी

गगन पर चमके चंदा
मै धरती पर चमकुगी

धरती पर चमकुगी
मै उजियारा करूंगी

बेटी हूँ मै बेटी तारा बनुगी

पढूंगी लिखूंगी मै मेहनत भी करूंगी
अपने पांव चलकर मै दुनिया को देखूंगी

दुनिया को देखूंगी
मै दुनिया को समझूंगी

बेटी हूँ मै बेटी तारा बनुगी

फुल जैसे सुन्दर बागों में खेलूंगी
तितली बनुगी मै हवा को चुमुंगी

हवा को चुमुंगी
मै नाचूंगी गाऊगी

बेटी हूँ मै बेटी तारा बनुगी
तारा बनुगी मै सहारा बनुगी

– शेख तसिलमा हुसैनमाई

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#5 Poem on Beti 


“कलियों को खिल जाने दो”

कलियों को खिल जाने दो,
मीठी ख़ुशबू फ़ैलाने दो
बंद करो उनकी हत्या,
अब जीवन ज्योत जलाने दो!!

कलियाँ जो तोड़ी तुमने,
तो फूल कहाँ से लाओगे ?
बेटी की हत्या करके तुम,
बहु कहाँ से लाओगे ?

माँ धरती पर आने दो,
उनको भी लहलाने दो
बंद करो उनकी हत्या,
अब जीवन ज्योत जलाने दो!!

माँ दुर्गा की पूजा करके,
भक्त बड़े कहलाते हो
कहाँ गयी वह भक्ति,
जो बेटी को मार गिराते हो.

लक्ष्मी को जीवन पाने दो,
घर आँगन दमकाने दो
बंद करो उनकी हत्या
अब जीवन ज्योत जलाने दो

#6 Poem on Beti 


“जीवन की एक आस है बेटी”

सब रोगों की दवा है बेटी,
जीवन की एक आस है बेटी

ममता का सम्मान है बेटी,
माता-पिता का मान है बेटी

आंगन की तुलसी है बेटी,
पूजा की कलसी है बेटी

सृष्टि है, शक्ति है बेटी,
दृष्टि है, भक्ति है बेटी

श्रद्धा है, विश्वास है बेटी
जीवन की एक आस है बेटी

#7 Poem on Beti 


“कहती बेटी बाँह पसार”

कहती बेटी बाँह पसार,
मुझे चाहिए प्यार दुलार।

बेटी की अनदेखी क्यूँ,
करता निष्ठुर संसार?

सोचो जरा हमारे बिन,
बसा सकोगे घर-परिवार?

गर्भ से लेकर यौवन तक,
मुझ पर लटक रही तलवार।

मेरी व्यथा और वेदना का,
अब हो स्थाई उपचार।

दोनों आंखें एक समान,
बेटों जैसे बेटी महान !

करनी है जीवन की रक्षा,
बेटियों की करो सुरक्षा

#8 Poem on Beti 


“मत मार मुझे जीवन दे दे”

बेटी ये कोख से बोल रही,
माँ करदे तू मुझपे उपकार.

मत मार मुझे जीवन दे दे,
मुझको भी देखने दे संसार.

बिना मेरे माँ तुम भैया को
राखी किससे बंधवाओंगी.

मरती रही कोख की हर बेटी
तो बहु कहाँ से लाओगे

बेटी ही बहन, बेटी ही दुल्हन
बेटी से ही होता परिवार

मानेगे पापा भी अब माँ
तुम बात बता के देखो तो

दादी नारी तुम भी नारी
सबको समझा के देखो तो

बिन नारी प्रीत अधूरी है
नारी बिन सुना है घर-बार

नही जानती मै इस दुनिया को
मैंने जाना माँ बस तुमको

मुझे पता तुझे है फ़िक्र मेरी
तू मार नही सकती मुझको

फिर क्यों इतनी मजबूर है तू
माँ क्यों है तू इतनी लाचार

गर में ना हुई तो माँ फिर तू
किसे दिल की बात बताएगी

मतलब की इस दुनिया में माँ
तू घुट घुट के रह जाएगी

बेटी ही समझे माँ का दुःख
‘अंकुश’ करलो बेटी से प्यार

-अजय नाथानी

#9 Poem on Beti hindi me


“मै बेटी हूँ मुझे आने दो, मुझे आने दो”

मै बेटी हूँ मुझे आने दो, मुझे आने दो
मुझे भी तितली की तरह गगन में उड़ना है।

मेरे आने से पतझड़ भी बसंत बन जाए,
और खाली मकान भी घर बन जाए।

मै वही साहसी बेटी हूँ
जो भेद गयी अंतरिक्ष को भी।

मै जग की जननी हूँ
मै बेटी हूँ मुझे आने दो, मुझे आने दो।

मुझे भी अटखेलिया करने दो
मुझे भी गीत मल्हार गाने दो।

रोशन कर दूंगी घर को ऐसे
जैसे कोई चाँद सितारा हो।

मै वही कर्मवती पद्मिनी, साहसी झाँसी रानी हूँ
जो न झुकेगी, न टूटेगी हर एक गम सह लेगी।

मै तेरी आँखों का तारा बनूँगी,
नाम तेरा रोशन करूंगी इस दुनिया में।

जब भी आएगी कोई बांधा या विपदा
मै तेरे साथ खड़ी होंगी, मै बेटी हूँ मुझे आने दो।

मै भी कल-कल करती नदियों की तरह
इस दुनिया रूपी समुंद्र जीना चाहती हूँ।

मै आउंगी जरुर आउंगी, फिर कुछ ऐसा कर जाउंगी
कि इस दुनिया को अमर कर जाउंगी।

मै कलियों में फूलो की तरह
तेरे घर को खुशियों से भर दूंगी।

मै वो वर्षा हूँ जो न आई तो
ये खुशियों से भरी धरा बंजर हो जाएगी।

मै सूरज की तरह चमकुगी
फिर एक नया सवेरा लाऊंगी।

मै बेटी हूँ मुझे आने दो, मुझे आने दो।

– नरेंद्र कुमार वर्मा


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दोस्तों Hindi Poem on Betiyan के बारे में यह कविताएँ आपको कैसी लगी, अगर अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर करना ना भूलें और अगर आपका कोई सवाल है चाहो तो हमें कमेंट करके बताएं।

30 thoughts on “Hindi Poem on Betiyan | बेटी पर कविता”

  1. bakhani hindi poems

    सभी हिंदी कविताएं दिल को छूने वाली हैं। इस प्रकार का संग्रह जहाँ पर एक ही शीर्षक पर विभिन्न कवि-कवयित्रियों की विभिन्न कविताएं एक जगह जल्दी नहीं मिलती हैं। सभी कविताएं एक से बढ कर एक हैं। देश की बेटियों को समर्पित कविताएं पढ कर दिल प्रशन्न हो गया।

    1. सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद bakhani hindi poems. आप ऐसे ही हिंदी यात्रा पर आते रहे.

    1. Gantantra Kandhare, Aap ko kavitaye acchi lagi hame bhut khushi hui, aise hi hindiyatra par aate rahe dhanyawad.

  2. MAHENDRA ANCHRA

    श्रीमान जी कोई एसी कविता भेजे जो वीर रस मे और काफी लम्वी हो जो रोगंट खङे कर दे
    वाट्सप न 6367915335

    1. मेहन्द्र जी हम जल्द ही ऐसी कविता लिखेंगे, हिंदी यात्रा पर आने के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Very good content….very touching…
    We can use them to inspire …people and can ask to save the daughters…they r very precious…and they r future of our country..

      1. Jis tarah , aapke is kavita se bahauto logo ko sikh mila hai , to mai bhi aapki agar ijajat ho to , is kavita se kuch panktiya lekar video bana sakta hu 🙏 taaki mai bhi aapke tarah logon ko kuch nahi sonch de saku

        1. Sachin Singh ji aap video bana sakte hai lekin hindi yatra ke es page ka link aap ko credit ke tor par description me dena hoga.

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