गर्मी की छुट्टी पर निबंध – Summer Vacation Essay in Hindi

Summer Vacation Essay in Hindi : दोस्तों आज हमने गर्मी की छुट्टी पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 के विद्यार्थियों के लिए लिखा है. इस निबंध की सहायता से सभी विद्यार्थी परीक्षाओं में निबंध लिख सकते है.

अध्यापकों द्वारा बच्चों को गर्मियों की छुट्टियों में होम वर्क के रूप में निबंध लिखना दिया जाता है, इसलिए विद्यार्थियों की सहायता के लिए हमने यह निबंध लिखा है.

Summer Vacation Essay in Hindi

Get some Good Essay on Summer Vacation in Hindi for class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 Students

Summer Vacation Essay in Hindi 150 Words


गर्मियों की छुट्टियां सबसे आनंदमय दिन होते है इन दिनों में गर्मी के कारण स्कूलों की छुट्टियां कर दी जाती है जिसे हम बच्चे बहुत खुश होते है क्योंकि इस समय पढ़ाई लिखाई का कोई बोझ नहीं होता सिर्फ खेलना और हंसी मजाक करना होता है इसलिए मुझे गर्मियों की छुट्टियां बहुत अच्छी लगती है.

इस बार की गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने नाना नानी के घर गया वहां पर मैंने खूब मस्ती की मेरे नाना मुझे सुबह बगीचे में खेलने के लिए लेकर जाते और मैं जब शाम को आते तो मेरे लिए बहुत सारी चॉकलेट और आइसक्रीम लेकर आते. वहां पर मैंने कुछ नए दोस्त भी बना लिए जिनके साथ में रोज खेलता था.

वहां पर मेरे छोटे पिकनिक पर भी गया जो कि मेरे लिए बहुत रोमांचक था छुट्टियों के आखिरी दिनों में मैं घर आ गया और स्कूल का कार्य किया. इस गर्मियों की छुट्टियां मेरे लिए सबसे यादगार पल थे.

Summer Vacation Essay in Hindi 250 Words


गर्मियों की छुट्टियों के बारे में सोच कर ही मन रोमांचित हो उठता है, मुझे गर्मियों की छुट्टियां बहुत पसंद है. हम बच्चे इन गर्मियों की छुट्टियों के लिए पूरी साल भर इंतजार करते है.

अभी बस कुछ दिनों बाद गर्मियों की छुट्टियां पड़ने वाली है मेरे साथी सहपाठी इन गर्मियों में पहाड़ी और ठंडे स्थानों पर जाने की योजना बना रहे है.

लेकिन मैं किसी अन्य स्थान पर नहीं जा सकता हूं क्योंकि मेरे पिताजी को कार्यालय में बहुत काम है. इसलिए मैं अपनी छुट्टियों को अच्छे कार्य करने में पूरी करूंगा. आखिरकार अब वह दिन आ गया जब से स्कूल की छुट्टियां हो गई है.

मैं सुबह शाम अपने दोस्तों के साथ खूब जी भर कर खेलता हूं लेकिन गर्मी होने के कारण दोपहर का समय यूं ही बीत जाता है और हम बाहर खेल भी नहीं पाते है.

हमे स्कूल में पढ़ाया गया था कि गर्मी बढ़ने का कारण है कि पेड़ों की संख्या लगातार कम हो रही है इसलिए मैं सोच रहा हूं कि इस बार की छुट्टियों का सदुपयोग करके में मेरे दोस्तों के साथ मिलकर जो उन्हें हमारे घर के आसपास के क्षेत्र में पेड़ लगाएं.

इसके लिए मेरे दोस्त भी मेरे साथ हो गए और हमने पूरी कॉलोनी में पौधे लगा दिए है जिससे पूरा वातावरण हरा भरा हो गया है.

यह देखकर पूरी कॉलोनी के लोगों ने एक छोटे पिकनिक का आयोजन किया है जिसमें मैं और मेरे दोस्तों ने खूब मौज मस्ती की, इस तरह मैंने गर्मियों की छुट्टियों में आनंद के साथ साथ समय का सदुपयोग भी किया और वातावरण को स्वच्छ और सुंदर भी बनाया.

Garmi ki Chutti Essay in Hindi 350 Words


इस बार की गर्मी की छुट्टियां बहुत यादगार रही क्योंकि इस बार हमारा पूरा परिवार गर्मी की छुट्टियां मनाने तमिलनाडु के ऊटी शहर गए थे. पिताजी ने इसकी तैयारियां लगभग 1 महीने पहले ही कर ली थी उन्होंने ट्रेन की टिकट बुक करवा दी थी.

ट्रेन से सफर करने का एक अलग ही मजा है क्योंकि ट्रेन खेत जंगल पहाड़ इत्यादि रास्तों से होकर गुजरती है जिससे देखने का बहुत मजा आता है और इसमें सफर आरामदायक भी होता है. ट्रेन के सफर में हमने समय बिताने के लिए अंताक्षरी खेली जिसमें बहुत आनंद आया.

पिताजी हमें बीच बीच में आने वाले शहरों और गांव के नाम बता रहे थे साथ ही वे वहां की परंपरा और संस्कृति के बारे में भी बता रहे थे जो मुझे जानकर बहुत ही रोचक लगा. यह बहुत ही रोमांचक सफर था क्योंकि इसमें घूमने के साथ-साथ शिक्षा भी मिल रही थी.

लगभग 2 दिन के पश्चात हम ऊटी शहर पहुंच गए, यह अन्य शहरों की तुलना में बहुत ही अलग था. यहां की हरी-भरी सुंदर वादियां मन को मोह लेती है. ऊटी शहर तमिलनाडु का प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है. यहां पर हम लगभग 1 सप्ताह रहे.

वहां पर पहले दिन हमने नीलगिरी की पहाड़ियों में चलने वाली भाप के इंजन वाली ट्रेन में बैठकर वहां के जंगलों की सुंदरता देखी ट्रेन बहुत ही धीरे चल रही थी और ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी इस नजारे को देखकर सब उत्सुक थे और सभी के मुख पर एक अलग सी खुशी थी.

इसके बाद हम ऊटी बोट हाउस गए वहां पर हमें एक दिन बिताया जिसमें हमें बहुत आनंद आया क्योंकि यहां का वातावरण बहुत ही शांत और सुंदरता पानी में रंग बिरंगी मछलियां तैर रही थी.

इसके बाद हमने वहां का रोज गार्डन, बोटैनिकल गार्डन, थ्रेड गार्डन का भ्रमण किया यहां पर रंग बिरंगी फूलों के बगीचे लगे हुए थे जिनसे पूरा वातावरण महक रहा था. इसके बाद हमने कलहट्टी का झरना देखा जो बहुत ऊंचा और सुंदर था.

अंतिम दिन घूमने पन्ना झील के किनारे पिकनिक के लिए गए. यह झील अत्यधिक सुंदर है यहां का नीला जल आंखों को ठंडक देता है.

इस तरह मैंने गर्मियों की छुट्टियों का आनंद उठाया.

Summer Vacation Essay in Hindi 600 words


हमारा परिवार दिल्ली शहर में रहता है हर बार की तरह इस बार भी गर्मी की छुट्टियां आने वाली है. हमारे स्कूल के सभी विद्यार्थी अलग अलग स्थान पर जाने की बात कर रहे है. देखते ही देखते हैं कब छुट्टियों के दिन आ गए पता ही नहीं चला हमने इस बार की छुट्टियों का कोई प्लान नहीं बनाया है.

इसलिए मैं और मेरी छोटी बहन अपने दादा-दादी के पास जा रहे है जो कि हमारी पैतृक गांव.में रहते है. गांव का रहन सहन बहुत ही साधारण है यहां का वातावरण शांत ठंडा और भीड़ रही है जिसके कारण हमें यहां पर आना अच्छा लगता है.

मेरे दादाजी रोज सुबह उठ कर हमें खेत की शहर कराने जाते हैं वहां पर सुबह ठंडी-ठंडी हवा चलती है चिड़ियों की चह चाहट मन मोह लेती है. किसान फसल को पानी दे रहे होते है गाय भैंस बकरी इधर-उधर चहल कदमी करते रहते है इतना मनमोहक नजारा हमें दिल्ली शहर में तो देखने को ही नहीं मिलता है.

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खेतों में दादा जी हमें अन्य किसानों से परिचय करवाते है वहां के किसान बहुत अच्छे है उन्होंने हमें पानी पिलाया और खेत में से गन्ना ला कर दिया जो कि खाने में बहुत स्वादिष्ट था.

दोपहर होने से पहले हम घर आ जाते हैं और स्वादिष्ट भोजन करते है साथ ही पीने के लिए दही छाछ और रबड़ी मिलती है जो कि गर्मी को कम कर देती है.

शाम को हम दोस्तों के साथ खेलने चले जाते है वहां पर हमने प्रकार के खेल खेलते है जैसे गिल्ली डंडा, चोर पुलिस, गेंद मार, क्रिकेट इत्यादि खेलते है. खेल खेल में बहुत मजा आता है और शाम तक हम बहुत थक जाते हैं इसलिए वापस घर चले जाते है.

शाम को भोजन करने के पश्चात दादा-दादी हमें नई-नई रोचक कहानियां सुनाते है साथ ही हमें पुराने जमाने की रोचक बातें भी बताते है जैसे हमारे ज्ञान में वृद्धि होती है और मजा भी आता है.

कभी-कभी दादी हमें मंदिर लेकर जाती है जहां का माहौल एकदम शांत होता है मंदिर की घंटियां मीठी-मीठी धुन सुनाती है. मंदिर के पुजारी जी बहुत अच्छे हैं वह हमें बहुत प्यार करते है और नई नई कहानियां सुनाते है. पुजारी जी ने हमें बताया कि कल मंदिर में बहुत बड़े मेले का आयोजन होने वाला है यह सुनकर तो हम फूले नहीं समा रहे थे.

बस फिर क्या था दूसरे दिन का इंतजार था. दूसरे दिन दादा जी ने मुझे कंधे पर बिठाया और मेले की सैर कराने निकल पड़े. मेला बहुत ही सुंदर सजा था कहीं कोई नाच गा रहा है तो कहीं कोई झूल झूल रहा है.

मैंने भी दादाजी को बोलकर झूला झूला जिसमें मुझे बहुत आनंद आया फिर वहां पर हमने समोसे खाए जोकि अत्यंत स्वादिष्ट थे.

इसके बाद हमने मंदिर में दर्शन किए और वापस आकर दादा जी ने मेरे और मेरी छोटी बहन के लिए कुछ खिलौने खरीदे साथ ही घर के लिए भी कुछ सामान खरीदा इसके बाद हम घर वापस आ गए. यह मेला देखकर मुझे बहुत खुशी हुई और आनंद भी आया.

कुछ ही दिनों में मेरे पिताजी और माताजी भी गांव आ गए और हम सब मिलकर एक छोटे पिकनिक पर गए जहां पर मैंने और मेरी छोटी बहन ने खूब मस्ती की हमने वहां पर तरह-तरह के झूले झूले और समुंदर किनारे बैठ कर भोजन किया.

समंदर की गीली रेत से छोटे-छोटे घर बनाए इस तरह समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला और फिर हम सब पुन: दिल्ली लौट आये.

दिल्ली आने के पश्चात मैंने स्कूल मैं दिया गया कार्य पूर्ण किया. इस तरह मैंने गर्मी की छुट्टियों का भरपूर इस्तेमाल किया. यह छुट्टियां मेरे को हमेशा के लिए यादगार रहेगी.


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