Earth Day Poems in Hindi – पृथ्वी दिवस पर कविताएं

Earth Day Poems in Hindi – पृथ्वी दिवस पर कविताएं दोस्तों आज हम आपके साथ पृथ्वी दिवस पर लिखी गई कविताएं शेयर कर रहे है Earth Day Poems in Hindi पर लिखी गई कविताएं सभी कक्षा और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई है. इन कविताओं को विद्यार्थी अपनी परीक्षा और प्रतियोगिताओं में काम में ले सकते है.

Earth Day Poems in Hindi

Best Earth Day Poems in Hindi

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पृथ्वी दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि वर्तमान में मानव द्वारा बहुत ज्यादा प्रदूषण फैलाया जा रहा है जिसके कारण पृथ्वी पर जीवन नष्ट होने की संभावना है इसलिए सभी लोगों में जागृति फैलाने के लिए Earth Day मनाया जाता है ताकि कम से कम लोग एक दिन तो कम प्रदूषण करें और अधिक से अधिक पेड़ लगाएं

पृथ्वी के अमूल्य खनिज पदार्थों का भी कम से कम भगवान करें क्योंकि यह सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है  अगर इनका अत्यधिक दोहन किया गया तो भविष्य में जिंक की कमी आ सकती है. इन सभी बातों को हमने पृथ्वी दिवस पर कविताएं लिखकर लोगों में जागृति लाने का प्रयास किया है

(1) Earth Day Poems in Hindi – Meri God Me Pale Jag Sara 

मेरी गोद में पले जग सारा,
हर प्राणी कि जान हूँ मैं

समझूँ भेद का मैं ना इशारा,
सबके लिए समान हूँ मैं

भरती अनाज से घर मैं तुम्हारा,
समस्या का समाधान हूँ मैं

धरती माँ जिसने भी पुकारा,
मैं उसके लिए महान हूँ मैं

कभी मैं चंचल बहती धारा,
कभी सूखा रेगिस्तान हूँ मैं

हर किसान का बनूँ सहारा,
खेत हूँ और खलिहान हूँ मैं

जिसको हर मिटाने वाला हारा,
वोही अमिट निशान हूँ मैं

– शायरी से यारी


(2)  Rang Birangi Dharti Poem in hindi

रंग बिरंगी धरती

सुंदर-सुंदर प्यारी-प्यारी
रंग बिरंगी धरती,
पहन चुनरिया रंगो वाली
दुल्हन जैसी लगती ।

नीला-नीला आसमान है
बादल काले-काले,
लाल, गुलाबी, नीले, पीले
फूल बड़े मतवाले ।

हरियाली की फ़ैली चादर
सब के मन को हरती,
सुंदर सुंदर प्यारी प्यारी
रंग बिरंगी धरती ।

काला कौवा, काली कोयल
भालू भी हैं काला,
कूकड़ू-कू करता है मुर्गा
लाल कलंगी वाला ।

सुबह-सुबह को भूरी चिड़िया
चीं-चीं चीं-चीं करती,
सुंदर-सुंदर प्यारी-प्यारी
रंग बिरंगी धरती ।

सुंदर-सुंदर प्यारी-प्यारी
रंग बिरंगी धरती,
पहन चुनरिया रंगो वाली
दुल्हन जैसी लगती ।

– प्रमोद भंडारी ‘पार्थ’


(3) Ek Din Mila Mujh ko Ek Koaa Poem in hindi

एक दिन मिला मुझको एक कोआ
बोला जीवन जीना बन गया ह्वाआ

जंगल अब नहीं रह गए बाकी
सब तरफ है मिटटी खाकी

सीमेंट के देवदार खड़े है
ईटो के चिनार खड़े है

मदिरा बनकर बहता पानी
पर्यावरण की खत्म कहानी

मनुष्य ने यह कार्य किया है
अपना खुद से नाश किया है

बनकर रावण मनुष्य ने हर ली धरा की सुन्दरता
जिसे लोटा लेने को कोई राम नहीं मिलता

ऊँची चिमनी रोकती धमनी
साँस के साथ निगलता धुँआ

जिन्दगी बन गयी मोत का कुआँ
खो गए जंगल गुम हो गए शेर

चारो तरफ कूडो के ढेर
जंगल को शहर बनाकर

नदी पर यु बांध बनाकर
बगियाँ को श्मसान बनाया

जीवन तुझे जीना ना आया
मनुष्य तेरे ऊपर उधार बड़ा है

पर्यावरण का अपार बड़ा है
जीवन भर तू उतार ना पाए

दिनों दिन बढ़ता जाए
प्रति माह कुछ पेड़ लगा दो

अपना कर्ज कुछ यू चूका दो
भावी पीढ़ी को बतला दो

हमने अपना फर्ज निभाया
जो कुछ उलझा था सुलझाया

आगे अब से खड़ा तुम्हारे
चाहे त्याग ना चाहे या खाना

वातावरण की स्वच्छता बढ़ाना


(4) Prakriti Hamari Badi Nirali – Earth Day Poems in Hindi

प्रकृति हमारी बड़ी निराली
इससे जुड़ी है ये दुनिया हमारी

प्रकृति से ही है धरा निराली
प्रकृति से ही फैली है हरियाली

वृक्ष प्रकृति का है शृंगार
इनको क्यो काट रहा है इंसान

नष्ट इसे करके अपने ही पाँव पर
कुल्हाड़ी क्यो मार रहा है इंसान

प्रकृति की गोद मे जन्म लिया है
फिर इसको क्यो उजाड़ना चाहता है

स्वार्थ साधने के बाद मूह फेर लेना
क्या मानव यही तेरी मानवता है?

प्रकृति दात्री है जिसने हमे सर्वस्व दिया
पर मानव उसे दासी क्यो समझता है

क्या मानव इतना स्वार्थी है कि
अपनी माँ को ही उजाड़ना चाहता है

– Pooja Luthra


(5) Kitni Acchi Lagti Hum ko Apni Payri Dharti

कितनी अच्छी लगती हमको अपनी प्यारी धरती
कितनी अच्छी लगती हमको अपनी प्यारी धरती

ठंडी-ठंडी हवा घुमती नदिया कल कल बहती
ठंडी-ठंडी हवा घुमती नदिया कल कल बहती

वृक्ष हमे जीवन देते है स्वच्छ हवा हमको देते है
खाना देते पानी देते गन्दी हवा स्वयं ले लेते

अधिक लगाए अगर पेड़ हम धरती भी बच जाएगी
रेगिस्तान ना और बनगे हरियाली छा जाएगी

छोटे होते जाते खेत बढती जाती सुखी रेत
छोटे होते जाते खेत बढती जाती सुखी रेत

बन गए कंकरीटो के जंगल गर्म हवा गाती है मंगल
बढ़ जाएगी गर्मी खूब बर्फ पिघल हम जाए डूब

सूखेगा नदियों का पानी पीली होगी चादर धानी

जीवन अगर बचाना है पेड़ अनेक लगाना है

हरियाली छा जाएगी धरती माँ बच जाएगी
हरियाली छा जाएगी धरती माँ बच जाएगी

– dr shashi goyal


(6) Bhumi Dharti Bhu Dhara Parthivi diwas poem in hindi

भूमि, धरती, भू, धरा
तेरे हैं कितने नाम

तू थी रंग बिरंगी
फूल फूलों से भरी भरी

तूने हम पर उपकार किया
हमने बदले में क्या दिया

तुझ से तेरा रूप है छीना
तुझसे तेरे रंग है छीने

पर अब मानव है जाग गया
हमने तुझसे यह वादा किया

अपना जंगल ना काटेंगे
नदियों को साफ रखेंगे

लौटा देंगे तेरा रंग रूप
चाहे हो कितनी बारिश और धूप


(7) Earth Day Kavita in hindi – Dharti Mara Hum Sab ki Aao ise Parnam Kare

धरती माता है हम सब की आओ इसे प्रणाम करे
बनी रहे इसकी सुंदरता आओ ऐसे काम करें

आओ हम सब मिलजुल कर इस धरती को भी स्वर्ग बना दें
देखो सुंदर रूप धरा को इस का हर कोना महका दें

नैतिक जिम्मेदारी समझकर नैतिकता से काम करें
हरा भरा करके इस धरती को आओ इसका सम्मान करें

मां तो है हम सबकी रक्षक हम इसके क्यों बने हैं भक्षक
यह धरती है पावन भूमि आओ बन जाएं इसके संरक्षक

कुदरत ने जो हमें दिया है हम सब उसका सम्मान करें
न छेड़ो इन उपहारों को, न कोई बुराई का काम करो।

बनी रहे इसकी सुंदरता, ऐसा भी कुछ काम करो।
धरती माता है हम सब की आओ इसे प्रणाम करे


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