खुशी एक चुनरी की कविता – गुरमीत मल्होत्रा

Khushi Ek Chunri Ki Poem : दोस्तों आज हम हिंदी यात्रा को पसंद करने वाली आदरणीय गुरमीत मल्होत्रा की लिखी हुई कविता को सांझा कर रहे हैं। यह कविता एक चुनरी के बारे में लिखी गई है लेकिन इस कविता को अगर आप ध्यान पूर्वक पढ़ते हैं तो आप पाएंगे कि चुनरी के माध्यम से गुरमीत जी नहीं हमारे जीवन जीने के दृष्टिकोण को बताया है।

गुरमीत जी गृहिणी और उधमी दोनों है. वर्तमान में कोरोनावायरस के कारण देशभर में लॉकडाउन लगा हुआ है। इसलिए समय का सदुपयोग करते हुए इन्होंने कविता लिखना प्रारंभ किया है इन कविताओं के माध्यम से वह  लोगों में सकारात्मकता का प्रसार करना चाहती है। 

जिससे लॉकडाउन के समय में घर पर रह रहे लोगों का मानसिक संतुलन अच्छा रहे और समाज में खुशी और विश्वास बना रहे।

अगर आप सभी को इनके द्वारा लिखी गई है कविता पसंद आती है तो आप इसको सोशल मीडिया पर फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से शेयर करना ना भूले और नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके इनका हौसला जरूर बढ़ाएं।

khushi ek chunri ki poem

खुशी एक चुनरी की


बिना निमंत्रण के आकार तेज़ हवा ने,
सब कुछ इधर उधर बिखेर दिया |
आँखें खुले रहने की नाकाम कोशिश करती,
और धूल मिट्टी ने उड़ना शुरू कर दिया ||

इस बिन बुलाये मेहमान से सभी परेशान थे,
इसके आने से दरवाजे खिड़की भी बेलगाम थे |
ज़ोर ज़ोर से बज कर अपनी नाराज़गी दिखा रहे थे,
उस तेज़ आँधी को वो भी मुंह चिढ़ा रहे थे ||

दूर एक तिरछी निगाह दौडाइ तो नज़र पड़ी,
एक चुनरी इस तेज़ हवा में बदहवास लहरा रही थी |
बेपरवाह से अपनी पूरी मस्ती में वो झूमे जा रही थी,
उसके इस रूप को देख आसमान भी बुँदे बरसा रही थी ||

मै सोचने लगी, कहीं इसी के निमंत्रण पर तो ये हवा नहीं आई,
मुमकिन है उसकी तड़प ही इसे इस ओर खींच लायी |
इस चुनरी की भी अपनी कोई कहानी होगी,
इस तरह लहरा कर जो उसे सुनानी होगी ||

ये भी हो सकता है की एक जगह पड़ी पड़ी थक गयी होगी,
लहराने और नाचने की उसकी इच्छा कहीं मुरझा रही होगी |
बिन हवा के वो कैसे नृत्य करती,
बिन हवा के वो कैसे हलचल करती ||

हवा की दिशा में वो बस उड़ना चाहती थी,
उसके दिये आदेश पर वो बहना चाहती थी |
हवा के प्रति ये था उसका पूर्ण समर्पण,
इस एक पल को जीना चाहता था उसका कण कण ||

उसकी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था,
आस पास की तबाही से उसे कुछ लेना देना ही नहीं था |
अपनी इच्छा के पूरे होने पर वो बहुत खुश थी,
कुदरत की मेहरबानी से वो बहुत तृप्त थी ||

– गुरमीत मल्होत्रा

लेखिका का परिचय –


Gurmeet Malhotra

मेरा नाम गुरमीत मल्होत्रा है, मैं दिल्ली में रहती हूँ। मैं मुंबई से कॉमर्स ग्रेजुएट हूं। मैंने एनआईआईटी मुंबई से कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में डिप्लोमा किया है। मैं एक गृहिणी और उद्यमी हूं। मैं दिल्ली के पीतमपुरा में म्यूजिक एन डांस एकेडमी नाम से एक डांस एकेडमी चलाती हूं। मैंने 2007 से कई कलाकारों को मंच प्रदान करते हुए कई कार्यक्रम किए हैं।

लॉकडाउन के दौरान कविता लिखना शुरू किया। मैं अपने लेखन के माध्यम से सकारात्मकता फैलाना चाहती हूं।

हिंदी यात्रा का संदेश –


गुरमीत मल्होत्रा जी हिंद यात्रा की पूरी टीम आपको बहुत-बहुत धन्यवाद करती है कि आपने लॉकडाउन के इस समय भी अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों में सकारात्मकता का प्रचार कर रही है। 

आपने अपनी  कविताओं को लोगों के समक्ष पहुंचाने के लिए हिंदी यात्रा को चुना इसके लिए आपका एक बार फिर से हिंदी यात्रा की संयुक्त टीम आपका आभार प्रकट करती है.  हम आपके सफल भविष्य की कामना करते हैं और आप हम से ऐसे ही जुड़े रहे और कविताएं लिखते रहें यही कामना करते है। धन्यवाद

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दोस्तों माँ पर Khushi Ek Chunri Ki Poem के बारे में यह कविताएँ आपको कैसी लगी, अगर अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर करना ना भूलें और अगर आपका कोई सवाल है चाहो तो हमें कमेंट करके बताएं।

6 thoughts on “खुशी एक चुनरी की कविता – गुरमीत मल्होत्रा”

  1. ब्रजेश कुमार

    लाज़वाब.. काफ़ी साकारत्मक हैं ,, गुरमीत जी की कविताएं!!

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