जो उसकी इच्छा Jo Uski Ichaa Moral Story in Hindi

Jo Uski Ichaa Moral Story in Hindi : दोस्तों आज हमने जो उसकी इच्छा पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए एक अच्छी और शिक्षाप्रद कहानी लिखी है।

इस कहानी से विद्यार्थियों को तो सीख मिलेगी ही साथ में अभिभावकों को भी अपनी गलती का एहसास होगा जो केवल किताबी ज्ञान पर ही जोर देते है।

Jo Uski Ichaa Moral Story in Hindi

Jo Uski Ichaa Moral Story in Hindi

एक समय की बात है एक बच्चा अपनी मां के साथ खरीदारी करने एक दुकान पर गया तो दुकानदार ने उसका मासूम चेहरा देखकर……

मीठी गोलियों का डिब्बा खोल कर उसके आगे करके कहा, ‘लो जितनी चाहे गोलियां ले लो. लेकिन बच्चे ने उसे बेहद शालीनता के साथ मन कर दिया।

यह देख दुकानदार आश्चर्यचकित हो गया उसने मन ही मन सोचा, ‘अन्य बच्चे तो गोलियां झट से ले लेते है यह बच्चा क्यों नही ले रहा।

इस बात को नजरअंदाज करते हुए दुकानदार ने दोबारा बच्चे से गोलियां लेने के लिए कहा. लेकिन बच्चे ने फिर भी गोलियां नही ली.

फिर बच्चे की माँ ने खुद भी बच्चे से गोलियां ले लेने के लिए कहा…..

लेकिन बच्चे ने खुद गोलियां निकालने के बजाय, दुकानदार के आगे हाथ फैला दिए और कहा, ‘आप खुद ही दे दो अंकल.’

दुकानदार ने खुशी जाहिर करते हुए ढेर सारी गोलियां निकालकर उसे डी तो बच्चे ने दोनों जेबों में डाल ली. बच्चे की मां भी यह सब आश्चर्य पूर्वक देख रही थी।

घर लौटते वक्त उसकी मां ने पूछा, ‘जब अंकल तुम्हारे सामने गोलियों का डिब्बा कर रहे थे, तो तुमने गोलियां नहीं ली, और जब उन्होंने खुद निकाल कर दी तो ले ली?

इसका क्या मतलब है?

बच्चे ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, ‘मां, मेरे हाथ छोटे हैं, अगर मैं डिब्बे से हो जा बोलिए निकालता तो एक या दो ही हाथ में आती।

अंकल के हाथ भरे थे उन्होंने निकाली तो देखो कितनी सारी मिल गई. ‘ठीक इसी तरह हमें उस ईश्वर की मर्जी में खुश रहना चाहिए वह जो हमें देता है हमारे लिए अच्छा ही देता है।

उसकी ओर से मिल रही है सौगातो को सहर्ष स्वीकार करके उसकी सजा में राजी रहना सीखें नहीं तो क्या पता वह किसी दिन में पूरा सागर देना चाहते हो और हम अज्ञानतावश बस एक चम्मच के ही उनके सामने खड़े हो।

शिक्षा – जीवन में जो भी मिल रहा है क्योंकि ईश्वर की इच्छा समझकर स्वीकार करें।

ज्ञान – जीवन में घटित होने वाली घटनाओं को ईश्वर की इच्छा समझकर स्वीकार करना अच्छी बात है लेकिन अपनी समस्याओं का ढींगरा भी ईश्वर पर थोपना गलत बात है।

हमें अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए स्वयं ही मेहनत करनी होगी ईश्वर तो सिर्फ राह दिखा सकता है उस पर चलना हमारा काम है। इसलिए ईश्वर के आशीर्वाद के साथ साथ हमें मेहनत और अकल से भी काम लेना चाहिए।

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