मेला पर निबंध – Essay on Mela in Hindi

Essay on Mela in Hindi दोस्तो आज हमने मेला पर निबंध लिखा है मेला पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए है. Essay on Mela in Hindi की सहायता से विद्यार्थी अपनी जानकारी बढ़ा सकते हैं और साथ ही  परीक्षाओं में भी इस निबंध का इस्तेमाल कर सकते है.

भारत देश अनेक संस्कृति और धर्मों का देश है अगर भारत को उत्सवो और मेलों का देश भी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि यहां पर हर दिन कहीं ना कहीं कोई मेला आया उत्सव जरूर मनाया जाता है.

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Get Some Essay on Mela in Hindi for School or College Student – 150, 250, 500 or 1000 words.

(1) Best Essay on Mela in Hindi 150 Words

भारत मेलों का देश है यहां पर हर रोज कहीं ना कहीं मेला लगा ही रहता है. मुझे मेले में जाना बहुत अधिक पसंद है हमारे गांव में हर साल दशहरा के दिन मेला भरता है. मेला दशहरा के दिन सुबह लगता है और रात 10:00 बजे तक मेले में चहल पहल रहती है.

दशहरा के दिन हमारे विद्यालय की छुट्टी होने के कारण हम पूरे दिन मेले में ही रहते है. मेले वाले दिन हम सुबह-सुबह नए कपड़े पहन कर तैयार हो जाते हैं फिर मैं अपने दोस्तों के पास जाता हूं फिर हम सब मिलकर मेले में जाते है. मेले में जाने के बाद हम खूब मस्ती करते हैं झूला झूलते हैं समोसे, कचोरी, गोलगप्पे खाते है.

मेले में कई प्रकार के कार्यक्रम होते है. उन सभी कार्यक्रमों को हम बड़े चाव से देखते है. मेले में कई जादूगर आते हैं जो कि जादू दिखाते है. पूरा मेला देखने के बाद हम शाम को घर लौट आते है.

(2) Essay on Mela in Hindi 250 Words – मेला पर निबंध 

हमारे देश में मेलों और त्योहारों की कोई कमी नहीं है. हमारे गांव में भी साल में दो बार रामलीला मैदान में मेला लगता है. मुझे और मेरे दोस्तों को मेला देखना बहुत पसंद है इसलिए हम हर बार मेला देखने जाते है. मेले की एक दो दिन पहले से ही हम बहुत खुश हो जाते है. मेले वाले दिन हम नए कपड़े पहन कर सुबह सुबह तैयार हो जाते है.

पिताजी से मेले में खर्च करने के लिए कुछ रुपए मिल जाते है. इसके बाद मैं अपने दोस्तों के साथ मेला देखने निकल पड़ता हूं. मेला रामलीला मैदान में लगता है जो कि हमारे घर से 1 किलोमीटर दूर पड़ता है. हम मेले में पैदल ही जाते हैं और आने जाने वाले हो लोगों और हमारे जैसे बच्चों को देखते है वे वह मेले से खरीदारी करके लौट रहे होते हैं खूब खुश होते हैं और गुब्बारे और सीटियां लेकर आते हैं यह देख हमारा उत्साह और बढ़ जाता है.

मेले में पहुंचते ही सभी जगह शोरगुल होता रहता है और बहुत ही भीड़ भाड़ रहती है. मेले में भीड़ भाड़ होने की वजह से कुछ लोग धक्का-मुक्की भी करते है. हम मेले में पहुंचते हैं पूरे मेले का एक राउंड लगाते हैं और फिर झूला झूलते है कबड्डी का मैच, जादूगर का खेल देखते है. कुछ समय बाद हमें भूख लगती है तो हम समोसे, कचोरी और गोलगप्पे खा कर अपना पेट भरते है.

इसके बाद हम कुछ खिलौने खरीदते है और एक बार फिर से मेले का एक राउंड और लगाते है. हम दिन भर मेले में रहकर उस का आनंद उठाते है. जैसे ही शाम होती है हम सब खुशी-खुशी घर लौट आते है.

यह भी पढ़ें –  पुस्तक मेला पर निबंध – Pustak Mela Essay in Hindi

(3) Essay on Mela in Hindi 500 Words

मेले भारत की संस्कृति को प्रदर्शित करते है मेलों के कारण लोग एक दूसरे से उत्साह से मिलते हैं और कुछ समय आनंद के साथ व्यतीत करते है. भारत में बड़े कुंभ के मेले से लेकर छोटे मेले हर साल लगते है कुछ मेले महीनों तक चलते हैं और कुछ एक-दो दिन और कुछ एक ही दिन तक चलते है.

भारतीय लोगों में मेलों को लेकर बहुत उत्साह रहता है वह मेले से 2 दिन पूर्व की इसकी तैयारियां करने लग जाते है. मेलों को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह है बच्चों में होता है क्योंकि उनको वहां उनको मनपसंद खिलौने एवं आइसक्रीम झूले झूले को मिलते है.

मेलों में दुकानदार दूर-दूर से अपना सामान बेचने आते है. आज मैं आपको मेरे द्वारा मेले में किए गए भ्रमण का वर्णन करता हूं. हमारा गांव हरिद्वार से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित है हमारे गांव में हर साल दुर्गा पूजा के अंतिम दिन एक बड़े मेले का आयोजन किया जाता है. यह मेला एक बहुत बड़े मैदान में आयोजित किया जाता है जहां पर हम रोज क्रिकेट भी खेलते है.

इस मेले का आयोजन इतना भव्य होता है कि आस-पास के गांव वाले भी इस मेले को देखने आते है. इस दिन हमारे गांव में बहुत चहल पहल रहती है. हम मेले वाले दिन सुबह उठकर अपना दैनिक कार्य करके मेले में जाने के लिए तैयार होते है. मैं, मेरा पूरा परिवार और मेरे दोस्त एक साथ मेला देखने के लिए जाते है.

हम जैसे ही मेले में प्रवेश करते हैं वहां पर बहुत भीड़ भाड़ रहती है लोग एक दूसरे से धक्का-मुक्की करते हुए चलते हैं क्योंकि वहां पर इतनी भीड़ होती है कि चलने की जगह ही नहीं होती है. इतनी भीड़ भाड़ होने के बावजूद भी लोग बड़े उत्साह से मेले का भरपूर आनंद लेते है. हम मेले में जाकर सबसे पहले मां दुर्गा के दर्शन करते है इसके बाद वहां हो रही सांस्कृतिक कार्यक्रम देखते है.

कुछ समय बाद हम मेला देखने निकल जाते हैं मैं और मेरे मित्र हर दुकान पर जाकर मोल भाव करते हैं और कुछ जरूरी सामान खरीदते है साथ ही अपने छोटे भाई बहनों के लिए खिलौने भी खरीदते है. इसके बाद हम छोटे बड़े झूलों में झूला झूलते है. मेले में कुछ दुकानदार चिल्ला-चिल्लाकर आइसक्रीम और खाने की वस्तु में भेजते रहते हैं हम उनसे कुछ आइसक्रीम और चाट खरीदकर बड़े चाव से खाते है.

मेले में बहुत शोर शराबा होता है क्योंकि सभी लोग चिल्ला-चिल्लाकर कुछ ना कुछ बेच रहे होते हैं और साथ ही वहां पर कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं तो वहां से DJ की आवाज आती रहती है. वहां पर जादूगर अपना खेल दिखाता है कभी कबूतर को खरगोश बनाता है तो कभी किसी को गायब कर देता है यह देखने में बहुत ही मजा आता है.

इसके बाद हम मेले में धीरे धीरे चलते हुए पूरा मेला देखते है. मेले में बहुत सी प्रदर्शनियां लगी हुई होती है जो कि अलग-अलग विषयों पर होती हैं जैसे की कोई प्रदर्शनी जल बचाने का संदेश देती है तो कोई प्रदूषण कम करने का यहां पर बड़े ही रोचक ढंग से प्रदर्शनियां प्रदर्शित की जाती है दोपहर होते-होते हम थक जाते हैं इसलिए घर की ओर निकल पड़ते है.

(4) Essay on Mela in Hindi 1000 Words – मेला पर निबंध 

भारत में मेलों का प्रमुख स्थान है भारतीय मेले उत्साह और मनोरंजन के लिए जाने जाते है. भारत के किसी भी शहर या गांव में जब भी मेले का आयोजन किया जाता है तो वह किसी न किसी कारण से किया जाता है. कुछ मेले किसी धर्म के देवी देवताओं से जुड़े हुए होते है तो कुछ देश के बड़े त्योहारों पर आयोजित होते है.

आजकल शहरों में लोगों के मनोरंजन के लिए कुछ मेले ऐसे भी आयोजित करती हो जाते है जिससे शहर के लोग अपनी चिंता भरी जिंदगी से चिंता मुक्त होकर मनोरंजन कर सकें. बहुत से मेले का आयोजन होता है उनमें से कुछ प्रमुख मिले इस प्रकार हैं कुंभ का मेला, पुष्कर का मेला, सावन मेला, सोनपुर का मेला, हेमिस गोंपा मेला आदि है.

भारत में तरह-तरह के मेलों का आयोजन किया जाता है जिसमें पशु मेला, विज्ञान मेला, पुस्तक मेला, बाल मेला, कृषि मेला, मनोरंजन के लिए मेला, घरेलू सामान का मेला, किसी धर्म या देवी देवताओं से जुड़ा हुआ मेला और आजकल तो वाहनों का मेला भी लगने लगा है.

भारत में मेलों का आयोजन पुराने जमाने से ही किया जाता रहा है इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि इस दिन लोग आपस में मिलजुल सकते हैं और अपने जीवन की समस्याओं को भूलाते हुए जीवन का आनंद ले सकते है.

हमारे गांव में भी हर साल दो से तीन मेलों का आयोजन होता है इसमें प्रमुख रुप से हमारे लोक देवता रामदेव जी का मेला लगता है. इस मेले का आयोजन बहुत ही बड़े मैदान में किया जाता है क्योंकि यह मेला करीब 10 दिनों तक चलता है जिसके कारण इसमें आसपास के शहरों और गांवों के लोग भी इस मेले को देखने आते है.

मैं और मेरे मित्र मेले वाले दिन सुबह ही मेले में नए कपड़े पहन कर और तैयार होकर मेले में पहुंच गए. यहां पर मेरे कुछ दोस्तों ने मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पानी पिलाने की व्यवस्था की थी वहां पर जाकर हमने शाम तक श्रद्धालुओं को पानी पिलाया और शाम होने पर हम मेले में घूमने के लिए निकल पड़े.

मेले में बहुत भीड़ भाड़ थी और संध्या का समय होने के कारण अधिक लोग मेले में आ रहे थे इसलिए वहां पर धक्का-मुक्की बहुत बढ़ गई थी. हमने सबसे पहले मेले में जाकर हमारे लोक देवता रामदेव जी के दर्शन किए और फिर मेला घूमने के लिए निकल पड़े.

मेले में चारों चारों तरफ दुकानदार चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को अपना सामान खरीदने के लिए लुभा रहे थे. कुछ लोग बड़े झूले पर झूल रहे थे जैसे ही झूला ऊपर जाता हूं लोग जोर-जोर से चिल्ला रहे थे और हंसी खुशी झूले का आनंद ले रहे थे.

बच्चों के लिए घोड़े वाले, मछली वाले और साधारण चकरी वाले झूले लगे हुए थे जिन पर बच्चे झूलकर बड़े खुश हो रहे थे. झूलो को देखकर हमारा मन में झूला झूलने को करने लगा इसलिए हमने भी बड़े वाले झूले की टिकट ली और झूले में बैठ गए झूला जैसे ही ऊपर जाता हमें बहुत अच्छा लगता लेकिन जैसे ही गांव नीचे की ओर आता हूं तो डर भी लगता लेकिन झूला झूलकर बहुत आनंद आया.

मेले में बहुत ही स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबू हमारा मन ललचा रही थी. हम भी मेले का आनंद लेते हुए चाट की दुकान पर पहुंचे और बहुत से स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद उठाया. इनमें मुझे सबसे स्वादिष्ट समोसे और कचोरी लगी. इसके बाद हमने कुछ गोलगप्पे खाए और रंग बिरंगी आइसक्रीम खाकर बहुत मजा किया.

मेले में एक तरफ सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे थे उनका भी हमने खूब उत्साह से आनंद उठाएं. इसके बाद मेले में एक तरफ पहलवानों की कुश्ती चल रही थी जिसमें एक पहलवान सभी पहलवानों को मात दे रहा था और आखिरकार वह जीत गया उसे जीतने पर 5100 रुपए का इनाम मिला. हमें भी कुश्ती देखकर एक अलग सा जोश आ गया.

मेले में एक तरफ प्रदर्शनी लगी हुई थी जहां पर कल ही लोग जा रहे थे लेकिन हमने प्रदर्शनिया जाकर देखी वहां पर अलग-अलग विषयों प्रदूषण, जल बचाओ, स्वच्छता अभियान आदि पर प्रदर्शनियां लगी हुई थी जो कि बहुत ही रोचक ढंग से सजी हुई थी.

संध्या के समय होने के कारण मेले में अधिक भीड़ हो गई थी इसलिए स्कूल के NCC के विद्यार्थी व्यवस्था संभालने में लगे हुए थे और अगर कहीं किसी का झगड़ा हो रहा होता तो वहां पर पुलिस भी व्यवस्था संभालने के लिए लगी हुई थी.

मेले में शाम को रंग बिरंगी लाइट जला दी गई थी जिसके कारण यह दृश्य बहुत ही मनोरम लग रहा था. हम मेले में आगे बढ़ रहे थे तभी हमें बहुत से खिलौनों की दुकान दिखाई दी वहां से मैंने अपने छोटे भाई बहनों के लिए कुछ गुब्बारे और कुछ खिलौने खरीदे.

आगे जाने पर एक जादूगर अपना जादू का खेल दिखा रहा था वह कभी फूल से कबूतर बनाता तो कबूतर से खरगोश हमें यह देख कर बहुत अच्छा लगा और हमने उत्साह से जादूगर का मनोबल बढ़ाते हुए तालियां बजाई. जादूगर ने भी खुश होते हुए हमें एक और जादू का खेल फ्री में दिखाया.

कुछ और आगे बढ़ने पर मेले में घरेलू सामान की दुकानें लगी हुई थी मैंने वहां से मां के लिए एक चिमटा और कुछ बर्तन खरीदें. शाम को लोग मेले में नाचते गाते हुए आ रहे थे और लोक देवता रामदेव जी के दर्शन कर रहे थे. मेले में बहुत देर घूमने के कारण हम बहुत थक गए थे इसलिए हम वहां एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए और सुस्ताने लगे.

कुछ देर बाद हम मेले का एक राउंड और लगाने निकले तो हमने देखा कि खिलौने वाले दुकानदार रंग-बिरंगी लाइटों वाले खिलौने बेच रहे थे कुछ खिलौनों तो लाइट की चमक के साथ आसमान की ओर जाते हैं और फिर नीचे घूमते हुए आते हैं यह देख हमें बहुत ही अच्छा लगा और हम सब ने एक-एक लाइट वाला खिलौना खरीद लिया.

धीरे-धीरे अब रात होने लगी थी और मेले में भीड़ भी कम होने लगी थी हम भी बहुत थक गए थे इसलिए हमने मेले से घर जाने का निश्चय किया और कुछ समय बाद हम घर पहुंच गए मैंने अपने भाई-बहनों को उनके खिलौने दिए और मां को मेले के बारे में बड़े उत्साह से बताया. ऐसा मेला मैंने कभी नहीं देखा था यह मेला सदा के लिए मेरी यादों में बस गया है.

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पुस्तक मेला पर निबंध – Pustak Mela Essay in Hindi

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41 thoughts on “मेला पर निबंध – Essay on Mela in Hindi”

  1. School Student anonymose

    ma bhi ak school student hu. ye essay mujhe bohut pasand bhi aya aur bohut easy bhi haa. Thank you . its amazing

  2. SchoolBoy Preet

    Hi, me ek school student hun or mujhe aapka essay bahot accha laga or mere bahot kaam aaya.
    Keep it up 😉

    1. सराहना के लिया बहुत बहुत आभार हेमंत श्रीवास जी, ऐसे ही हिंदी यात्रा पर आते रहे धन्यवाद

  3. Bhai nibandh thora aacha nhi lga 1 wala nibandh uss me kai mistake hai check krke aache se internet me daala kro jo man me aayega wahi nibandh daal do ge chal hat

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