Hindi Kahawat With Photo : दोस्तों आज हमने हिंदी कहावतें लिखी है। यह कहावत है अक्सर हमारी आम बोलचाल में बोली जाती है लेकिन नई जनरेशन के बच्चों को उनके बारे में पता नहीं है जिस कारण वह इनको सुनकर असमझ में पड़ जाते है।
अक्सर वह इनके अर्थ खोजते रहते है लेकिन उनको सही माध्यम नहीं मिल पाता है वर्तमान में तो कहावतें यूपीएससी ,आईएएस जैसी परीक्षाओं में भी पूछी जाने लगी है इसलिए इनका महत्व और भी बढ़ जाता है।
यह कहावत है इतनी रोचक होती है कि हम शब्दों में भी अपना पूरा अर्थ यह होती है। इसीलिए इनको बोलने में जितना मजा आता है उतना ही इनका अर्थ भी गहरा होता है. विद्यार्थियों के लिए हमने कुछ प्रसिद्ध कहावतें यहां पर लिखी हैं जिससे वह इनको पढ़कर इन के अर्थ को जान पाए।
विषय-सूची
Hindi Kahawat with Pictures
1. अकसीर की बूटी – अचूक औषधि।
2. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता – एक व्यक्ति बड़ा कार्य नहीं कर सकता।
3. अगिया वैताल – शक्तिशाली व्यक्ति।
4. अधजल गगरी छलकत जाए – ओछा व्यक्ति इतरा कर कार्य करता है।
5. अपनी करनी पार उतरनी – कर्म फल भोगना ही पड़ता है।
6. अंधा क्या चाहे दो आंखें – इच्छित वस्तु पाना।
7. अंधा पीसे कुत्ता खाए – परिश्रम कोई और करे लाभ कोई और पाए।
8. अंधेर नगरी चौपट राजा – नियम व्यवस्था शून्य अयोग्य प्रशासन।
9. अंधे के हाथ बटेर – अयोग्य असमर्थ को बड़ा लाभ मिलना।
10. अंधे की लाठी – एकमात्र सहारा।
11. ऊंची दुकान फीके पकवान – नाम मात्र का बड़प्पन।
12. चने के साथ घुन भी पिसता है – अपराधी के संग निर्दोष भी दोषी होता है।
13. चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए – अत्यधिक कंजूसी।
14. चोर चोर मौसेरे भाई – दोषी लोगों का आपस में मेल होना।
15. चोरी की होरी – पाप पूर्ण कमाई का विनाश।
16. चोबी जी गए छब्बेजी बनने, दुब्बे जी रह गए – लाभ प्राप्ति की अपेक्षा हानि होना।
17. ऊंट के मुंह में जीरा – अधिक आवश्यकता कम प्राप्ति।
18. उतर गई लोई क्या करेगा कोई – लोक लाज जाने पर निंदा से क्या भय।
19. उधो का लेना न माधो का देना – कोई झंझट झमेला न होना ।
20. उल्टे बांस बरेली को – विपरीत कार्य करना।
हिंदी कहावतें
21. आंख का अंधा गांठ का पूरा – मूर्ख धनी व्यक्ति।
22. आंधी के आम – बहुत सस्ती वस्तु।
23. अपना ही बर्तन खोटा हो तो परखने वाले का दोष क्या – अपने ही वस्तु, व्यक्तियों में दोष हो तो दूसरे दोष देंगे ही।
24. अपना फूटे तो फूटे दूसरों का सगुन बिगड़े – दूसरों को हानि पहुंचाने के लिए अपना नुकसान कर लेना।
25. अपनी पगड़ी अपने हाथ – अपना सम्मान अपने हाथ होता है।
26. एक अनार सौ बीमार – वस्तु कम जरूरत अधिक।
27. कंगाली में आटा गीला – विपत्ति पर विपत्ति आना।
28. कभी गाड़ी पर नाम कभी नाव गाड़ी पर – समयानुसार एक दूसरे से सहायता लेना।
29. कर लो सो काम भजनों से राम – शुभ कार्य करने में देर ना हो।
30. कहां राजा भोज कहां गंगूवा तेली – बहुत अंतर होना।
31. कहीं की ईट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा – यहां वहां की वस्तुएं एकत्र करना।
32. कागज की नाव बनाना – दिखावटी सामान।
33. काटो तो खून नहीं – अत्यधिक भयभीत होना।
34. एक और एक ग्यारह होते है – संगठन में शक्ति होती है।
35. एक तो गिलोय फिर नीम चढ़ी – दुष्ट व्यक्ति का कुसंगत में और अधिक दुष्ट होना।
36. एक तो चोरी दूसरे सीनाजोरी – बुरा काम करने के बावजूद रोब जमाना।
37. एक मछली सारा तालाब गंदा करती है – एक बुरे व्यक्ति से समाज की बदनामी होती है।
38. एक हाथ से ताली नहीं बजती – झगड़ा एक के किए नहीं होता।
39. अपनी जूती/ मोगरी अपने ही सिर – स्वयं को स्वयं द्वारा दंडित किया जाना।
40. अपनी अपनी डफली अपना अपना राग – विभिन्न मत।
Hindi Kahawat With Meaning
41. अभी दिल्ली दूर है – अभी बहुत कार्य बाकी है।
42. आगे नाथ न पीछे पगहा – परम स्वतंत्र।
43. आगे कुआं पीछे खाई – चारों ओर से विपत्ति से गिरना।
44. आ बैल मुझे मार – मुसीबत मोल लेना।
45. आधा तीतर आधा बटेर – बेतुकापन।
46. आधी दौड़ सारी को घावे आधी रहे ने सारी पावे – लालच में सर्वस्व गवाना।
47. आप काज महाकाज – अपना काम अपने हाथों अच्छा होता है।
48. आम के आम गुठलियों के दाम – दोहरा लाभ।
49. आम खाने या पेड़ गिनने – कार्य से सरोकार रखना, व्यर्थ बातों से दूर रहना।
50. आसमान से गिरा खजूर में अटका – एक विपत्ति से बचकर दूसरी में फसना।
51. इस हाथ दे उस हाथ ले – शीघ्र प्राप्त होने वाला लाभ।
52. चलती का नाम गाड़ी है – सभी भले के साथ होते हैं।
53. चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात – कुछ समय का सुख ।
54. चिकने घड़े पर पानी नहीं ठहरता – बेशर्म पर किसी बात का असर नहीं होता।
55. चोर की दाढ़ी में तिनका – अपराधी को ही आशंका होती है।
56. चोर के पांव नहीं होते – अपराधी स्थिर नहीं रह सकता।
57. इकली लकड़ी ना जले – अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता।
58. ओखली में सिर दिया तो मुंह मूसलो से क्या डरना – कठिन कार्य प्रारंभ करने पर आने वाली विपत्तियों से क्या डरना।
59. ओसी चाटने से प्यास नहीं बुझती – छोटे प्रयासों से लक्ष्य प्राप्त नहीं होता।
60. अंगूर खट्टे हैं – प्राप्त न हो सकने वाली वस्तु में दोष निकालना।
61. कांठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती- कपट बार-बार सफल नहीं होता।
62. घर का भेदी लंका ढाए – आपसी फूट हानिकारक होती है।
63. घर की मुर्गी दाल बराबर – अपनी वस्तु की कीमत न समझना।
64. घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने – अपनी औकात से बढ़कर मिथ्या शान प्रदर्शन करना।
65. घोड़ा घास से यारी करे तो खाए क्या – यदि पारिश्रमिक न लिया जाए तो निर्वाह कैसे होगा।
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